
ग्वालियर. मध्य प्रदेश में पान मसाला और गुटखा उद्योग में जारी अरबों रुपये के टैक्स अपवंचन (कर चोरी) के खिलाफ अब केंद्रीय खुफिया एजेंसी डीजीजीआई (डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस) ने सीधे मोर्चा संभाल लिया है। राज्य जीएसटी और केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) विभाग की सुस्ती के बीच डीजीजीआई की टीमों ने सीधे निर्माण यूनिटों पर छापे मारना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में डीजीजीआई जबलपुर की क्षेत्रीय इकाई ने ग्वालियर स्थित गोपी पान मसाला से जुड़ी निर्माण यूनिट पर औचक कार्रवाई करते हुए मशीनों की उत्पादन क्षमता और बिक्री से जुड़े दस्तावेज जब्त किए हैं। जानकारों के मुताबिक, ग्वालियर सहित पूरे मध्य प्रदेश में पान मसाला बनाने वाली 15 से अधिक बड़ी यूनिटें सक्रिय हैं। इन यूनिटों का संयुक्त मासिक उत्पादन करीब 2000 करोड़ रुपये है। 1 फरवरी 2026 से पान मसाला व गुटखा पर जीएसटी की दर 28 से बढ़ाकर 40 फीसदी कर दी गई है। इस हिसाब से हर महीने सरकार के खाते में करीब 800 करोड़ रुपये टैक्स जमा होना चाहिए। लेकिन चौंकानी वाली बात यह है कि इसका महज 25 फीसदी (करीब 200 करोड़ रुपये) ही टैक्स के रूप में दिखाया जा रहा है, जबकि शेष 75 फीसदी यानी करीब 600 करोड़ रुपये प्रतिमाह की कर चोरी धड़ल्ले से की जा रही है।
एक गाड़ी… पांच चक्कर का फर्जीवाड़ा
टैक्स चोरी के इस बड़े सिंडिकेट में सबसे बड़ा जरिया इ-वे बिल का दुरुपयोग है। नियमों के तहत हर चक्कर का अलग ई-वे बिल जनरेट होना चाहिए। लेकिन जांच में सामने आया है कि पान मसाला परिवहन करने वाले वाहन एक ही ई-वे बिल का बार-बार इस्तेमाल कर एक के बजाय पांच-पांच चक्कर लगा रहे हैं। इससे कागजों पर माल कम और बाजार में सप्लाई पांच गुना ज्यादा हो रही है।