
Gwalior news: मध्यप्रदेश के ग्वालियर शहर में आधार में नाम, सरनेम या जन्मतिथि में बदलाव कराना अब लोगों के लिए परेशानी का सबब बन रहा है। कई मामलों में नाम में बड़ा बदलाव, सरनेम बदलने या शादी के बाद पूरा नाम बदलने के लिए राजपत्र यानी गजट में प्रकाशन कराना जरूरी है। इसके लिए लोगों को हजारों रुपए खर्च करने के साथ 3 से 6 महीने तक प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार करना पड़ रहा है। मामूली टाइपिंग गलती या दस्तावेज की कमी होने पर आवेदन भी निरस्त हो जाता है।
यूआइडीएआइ की गाइडलाइन के अनुसार नाम परिवर्तन के लिए राजपत्र में प्रकाशन अनिवार्य है। यह केंद्र सरकार का नियम है। गजट में नाम प्रकाशित हुए बिना ऐसे मामलों में आधार में नाम परिवर्तन नहीं किया जा सकता। आवेदन करने पर वह निरस्त हो जाता है। जन्मतिथि में सुधार को लेकर भी लोगों को पुरेशानी होती है। -आशीष जैन, जिला प्रबंधक, ई-गवर्नेस
-दस्तावेजों के आधार पर पूरा नाम बदलना हो। सरनेम में बदलाव करना हो।
-विवाह के बाद पूरा नाम बदलना हो।
-तय सीमा से अधिक बार नाम बदल चुके हों।
-धर्म परिवर्तन या कोर्ट के आदेश के आधार पर नाम बदलना हो।
आधार सेवा केंद्र संचालकों के अनुसार गजट प्रकाशन की सरकारी फीस 700 से 2500 रुपए तक है। इसके अलावा 50 रुपए के स्टांप पर शपथ पत्र, नोटरी, दो अखबारों में नाम परिवर्तन की सूचना, वकील की फीस और दस्तावेज तैयार कराने में 5 से 10 हजार रुपए खर्च हो रहा है। कुछ मामलों में 15 हजार रुपए तक वसूले जाने की शिकायतें भी हैं। इसके बाद भी प्रक्रिया में 3 से 6 महीने लग रहे हैं। इस दौरान लोगों को आधार केंद्र, कोर्ट और अखबार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
मध्यप्रदेश में जहां आधार में नाम परिवर्तन के लिए लोगों को कई जगह के चक्कर लगाने पड़ रहे है, वहीं छत्तीसगढ़ सरकार ने सेवा सेतु पोर्टल के जरिए राजपत्र में नाम प्रकाशन की ऑनलाइन सुविधा शुरू की है। इसमें आवेदन घर बैठे किया जा सकता है। इसके अलावा आवेदक को मात्र 430 रुपए का एसबीआइ चालान, स्थानीय अखबार में प्रकाशित नाम परिवर्तन की सूचना, दो गवाहों के हस्ताक्षर वाला फॉर्म और 50 रुपए के स्टांप पर नोटरीकृत शपथ पत्र इस पोर्टल प्र अपलोड करना होता है। शपथ पत्र में उल्लेखित दस्तावेजों की प्रतियां भी लगानी होती हैं। आवेदन के निराकरण के लिए 29 कार्य दिवस की समय सीमा तय है।