ग्वालियर

सीप नदी के 8 घाट से है शहर की सुरक्षा, सभी घाट जर्जर, सौंदर्यीकरण की सिर्फ बातें काम कुछ नहीं

-श्योपुर और बड़ौदा के लिए बने प्लान, अमल एक पर भी नहीं

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सीप नदी के 8 घाट से है शहर की सुरक्षा, सभी घाट जर्जर, सौंदर्यीकरण की सिर्फ बातें काम कुछ नहीं
सीप नदी के 8 घाट से है शहर की सुरक्षा, सभी घाट जर्जर, सौंदर्यीकरण की सिर्फ बातें काम कुछ नहीं

श्योपुर। सीप नदी के आठ घाट न सिर्फ शहर की सुंदरता को बढ़ाते थे, बल्कि बारिश में नदी के पानी को भी शहर में आने से रोकते थे। अब ये सभी एतिहासिक घाट जर्जर हैं। पिकनिक स्पॉट की जगह गंदे पानी के निकास की जगह बन चुके हैं। बीते वर्ष बारिश के समय इन्हीं घाटों से शहर में पानी ने प्रवेश किया था। न तो इन घाटों को अभी तक साफ करने का प्रयास किया गया और न ही नदी के पानी में मिल रही गंदगी को रोका गया है। सौंदर्यीकरण को लेकर बीते पांच महीने में नगर पालिका प्रबंधन ने 25 करोड़ रुपए खर्च करने का प्लान बनाया। अब घाटों के आसपास आरसीसी बनाकर जमीन को पक्का किया जा रहा है, लेकिन जिन घाटों को मरम्मत और सौंदर्यीकरण की सबसे ज्यादा जरूरत वहां कोई काम नहीं हुआ। नदी का पानी इतना गंदा है कि पास में खड़े होने पर बदबू आती है। किले से लेकर गिर्राज घाट तक एक भी घाट ऐसा नहीं है, जहां कुछ समय तक रुका जा सके।


यह है घाटों की स्थिति


रामजानकी मंदिर
-रामजानकी मंदिर के पास भादुड़ी, कदवाल और सीप नदियों का संगम है। रामजानकी मंदिर और सोनेश्वर महादेव मंदिर के पुराने घाट थे, ये अब जर्जर हैं। नजदीक ही गुप्तेश्वर महादेव मंदिर का घाट इसकी स्थिति सबसे खराब है।


कर्बला घाट
-ताजिया ठंडे करने के स्थान सहित पुरानी एतिहासिक जगह है। यहां इमारतें बनी हैं और इसके नीचे ही कुछ सीढिय़ां नजर आती हैं। किले की ओर से घाट की स्थिति बेहद खराब है। आसपास अतिक्रमण भी हो रहा है।


जती घाट
-संत मधुवनदास की तपस्थली सीप नदी के किनारे रही है। यहां पुराने पेड़ हैं जो घाट को सुंंदरता प्रदान करते रहे हैं। घाट की सीढिय़ां कुछ हद तक ठीक हैं, लेकिन नदी में कचरा भरा है। यहां नहाया नहीं जा सकता।


पंडित घाट
-पितर पक्ष में इस घाट पर तर्पण किया जाता है। इसी घाट पर शहर के अधिकतर गंदे नालों का पानी सीप नदी में मिलता है। वर्तमान में घाट की मरम्मत का काम चल रहा है लेकिन गंदे पानी को नदी मेें मिलने से रोकने का कोई प्रयास नहीं हो रहा।


गिर्राज घाट
-यह घाट पुरुषोत्तम मास में स्नान के लिए महत्वपूर्ण माना जाता रहा है। घाट के पास एतिहासिक शिवलिंग और देवी मंदिर है। नजदीक ही व्यायामशाला है। रियासतकाल में इस घाट को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता था लेकिन अब यहां गंदगी पसरी है।


यह बनी है योजना
-रामजानकी मंदिर से लेकर बंजारा डेम तक सीप नदी पर मौजूद आठ घाटों का सौंदर्यीकरण कराया जाना है। नदी के दोनों ओर कॉरीडोर विकसित होना है। नदी में साफ पानी रखने के लिए प्रयास करने हैं। हालांकि, नगर पालिका ने अभी तक इनमें एक भी प्रयास पूरा नहीं किया है। नदी के आसपास गंदगी है। दोनों ओर अतिक्रमण से बहाव क्षेत्र मुश्किल से 100 फीट रह गया है।

Published on:
23 Jun 2023 11:59 pm