इस बार भव्य होगी लोगों की दिवाली, मोदी सरकार के आदेश का मिलेगा लाभ
ग्वालियरः जी हां, यह बात एक दम सच है कि, यह त्यौहारी सीजन, खासतौर पर इस बार देशभर में मनाई जाने वाली दिवाली बड़ी धूमधाम से मनाई जाएगी। क्योंकि, इस बार मध्य प्रदेश समेत देशभर में बिकने वाले पटाखों के रेट पिछले साल के मुकाबले लगभग आधे हो गए हैं। यानी, अब आपको त्यौहारी सीजन के जश्न के लिए पटाखा खरीदते समय दुकानदार से रेट कम कराने की मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी। इस बार पटाखों के पैकेट पर वास्तविक अधिकतम फुटकर मूल्य (एमआरपी) प्रिंट होकर आए हैं। यह रेट जीएसटी की वजह से प्रिंट हुए हैं क्योंकि पटाखा उत्पादक को एमआरपी के मान से ही जीएसटी देना पड़ता है, इसलिए उत्पादकों ने इस बार हर तरह के पैकेट पर जीएसटी युक्त रेट प्रिंट करके ही मार्केट में भेजे हैं।
40 से 55 फीसदी तक कम हुए दाम
इस बदलाव के बाद अब ग्राहकों को पटाखों की खरीदी के समय अनुचित दाम नहीं चुकाने पड़ेंगे। इसी वजह से इसकी एमआरपी में 40 से 55 फीसदी तक की गिरावट आ गई है। साल 2017 तक पटाखा उत्पादक कई गुना अधिक एमआरपी डालकर फुटकर बाजार में भेजते रहते थे, इससे फुटकर दुकानदार ग्राहकों से तगड़ा मुनाफा कमाते थे। लेकिन, अब सरकार ने जब से जीएसटी नियम लागू किया है, तब से उत्पाद पर छपे एमआरपी रेट पर ही जीएसटी लगाया जा रहा है। इसलिए उत्पादकों ने अपने रेट मिनिमम करके छापना शुरु कर दिए हैं। इससे ग्राहकों को कम दामों में पटाखे मिल सकेंगे।
पहले बड़ा डिस्काउंट देते थे पटाखा विक्रेता, अब नहीं देंगे
बता दें कि, अब तक पटाखों के पैकेटों पर उपभोक्ताओं द्वारा वास्तविक रेट नहीं लिखे होते थे। पटाखा विक्रेता ग्राहक को उनकी एमआरपी के पैसे जोड़कर 15 से 30 फीसदी तक छूट दे देता था। इससे लोगों को लगता था कि, वह इतने बड़े डिस्काउंट पर पटाखे लेकर आ रहें हैं, लेकिन हकीकत यह होती थी कि, पहले से ही कंपनी की तरफ से पटाखे के दामों को लगभग डबल रेट लगाकर मार्केट में भेजा जाता था, लेकिन जब से केंद्र सरकार ने छोटे और बड़े पटाखों पर जीएसटी के तहत टैक्स स्लैब बनाया है। जब से इन उपभोक्ताओं को सत्यापित मुल्य ही पटाखे के पेकेट पर देना पड़ रहा है। सरकार ने छोटे पटाखों पर 18 फीसदी जीएसटी लगाया है और बड़े पटाखों पर 28 फीसदी तक टैक्स लगाया है। जीएसटी की वजह से वास्तविक रेट प्रिंट हुए हैं।
अब पक्का बिल भी ले सकते हैं ग्राहक
इस बार ग्राहक चाहे तो पटाखा विक्रेता को खरीदे हुए पटाखे का पक्का बिल भी ले सकता है, इससे पहले आमतौर पर पटाखा विक्रेता ग्राहकों को पक्का बिल नहीं देते थे। कई अलग अलग दुकानो पर पटाखे के पैकेट पर एमआरपी के प्रिंट में भी अंतर होता था, लेकिन इस बार उपभोक्ताओं को बार कोड के साथ पूरी जानकारी लिखनी पड़ी है, जिससे पटाखा विक्रेता ग्राहकों को ज्यादा से ज्यादा 10 फीसदी ही डिस्काउंट दे पाएगा। क्योंकि, इनके दाम पहले से ही कम हैं।