Registration of Illegal Colonies: आदेश में कानूनी स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट करते हुए कहा गया है कि किसी भी दस्तावेज का पंजीयन उस संपत्ति के मालिकाना हक का अंतिम प्रमाण नहीं होता है।
Registration of Illegal Colonies: मध्यप्रदेश की अवैध कॉलोनियों (Illegal Colonies) में जमीन और मकानों की रजिस्ट्री को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है। राज्य शासन ने स्पष्ट कर दिया है कि जिला प्रशासन या नगर निगम अवैध कॉलोनियों के नाम पर रजिस्ट्री नहीं रोक सकते और न ही एनओसी की अनिवार्यता थोप सकते हैं।
वाणिज्य कर विभाग के अवर सचिव द्वारा जारी आदेश में ऐसे सभी प्रशासनिक प्रतिबंधों को विधि-विरुद्ध बता तत्काल प्रभाव से निष्प्रभावी किया है। आदेश में कानूनी स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट करते हुए कहा गया है कि किसी भी दस्तावेज का पंजीयन (रजिस्ट्री) उस संपत्ति के स्वत्व (मालिकाना हक) का अंतिम प्रमाण नहीं होता है।
पंजीयन अधिकारी न बनें जांचकर्ताः पंजीयन अधिनियम के तहत सब-रजिस्ट्रार का काम केवल दस्तावेज लिखाने वालों की पहचान और आपसी सहमति की जांच करना है। कॉलोनी वैध है या अवैध, इसकी विस्तृत जांच का भार पंजीयन अधिकारी पर डालना कानून के खिलाफ है।
इनकार के नियम बेहद सीमितः मप्र पंजीयन नियम में जिन विशिष्ट और गिने-चुने कारणों का उल्लेख है, केवल उन्हीं के आधार पर रजिस्ट्री से इनकार किया जा सकता है। इसके अलावा किसी अन्य प्रशासनिक आदेश के आधार पर रजिस्ट्री नहीं रोकी जा सकती।
मप्र बनाम पूरन सिंह नरवरिया, 2014: इसमें सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि अवैध निर्माण या अवैध कॉलोनाइजेशन के मामले की जांच करना पंजीयन विभाग के अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र से बिल्कुल बाहर की बात है।
नियम 23 का गलत इस्तेमाल बंद होः मप्र नगरपालिका नियम, 2021 के नियम 23 का हवाला देकर जो एनओसी मांगी जा रही है, वह केवल एक निश्चित कट-ऑफ तिथि से पूर्व की अवैध कॉलोनियों के लिए है। इसका सामान्यीकरण कर हर रजिस्ट्री पर प्रतिबंध लगाना गलत है।
बीते कुछ दिनों पहले ही ग्वालियर में अवैध कॉलोनियों पर सख्ती भी की गई थी। शासन से मिले निर्देश के बाद जिला प्रशासन और पुलिस एक्शन मोड़ में हैं। मुरार ब्लॉक के बिजौली क्षेत्र में धनेली और करगंवा की चार अवैध कॉलोनियों के खिलाफ कड़ा एक्शन लिया गया। पुलिस ने कॉलोनियां विकसित करने वाले बिल्डर और कॉलोनाइजरों के खिलाफ मध्यप्रदेश ग्राम पंचायत राज एवं स्वराज अधिनियम, 1993 के तहत मामला दर्ज किया था। यहां 13 अवैध कॉलोनियों पर FIR दर्ज हो चुकी हैं। पुलिस आरोपियों की तलाश कर रही है। इन पर नियमों को ताक पर रखकर आम लोगों के घर के सपनों से खिलवाड़ करने का आरोप है।