ग्वालियर

धनतेरस से पहले सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ रवि-पुष्य योग में बरसेगी समृद्धि, खरीदारी का महामुहूर्त

दीपावली की खरीदारी के लिए बाजार सजकर तैयार हैं और इस बार खरीदारी के शौकीनों के लिए ग्रह-नक्षत्रों ने भी शुभ संयोगों की सौगात दी है। दीपावली से पहले 1 नवंबर रविवार को रवि-पुष्यामृत योग का विशेष संयोग बन रहा है। खास बात यह है कि इस दिन सूर्योदय के साथ शुरू होने वाला पुष्य नक्षत्र देर रात तक खरीदारी के लिए शुभ रहेगा। यानी सुबह से लेकर देर रात तक बाजारों में खरीदारी की रौनक जमाने का मौका मिलेगा।
2 min read
• •
Updated: 31 Oct 2026, 11:20 AM IST
दीपावली की खरीदारी के लिए बाजार सजकर तैयार हैं और इस बार खरीदारी के शौकीनों के लिए ग्रह-नक्षत्रों ने भी शुभ संयोगों की सौगात दी है। दीपावली से पहले 1 नवंबर रविवार को रवि-पुष्यामृत योग का विशेष संयोग बन रहा है। खास बात यह है कि इस दिन सूर्योदय के साथ शुरू होने वाला पुष्य नक्षत्र देर रात तक खरीदारी के लिए शुभ रहेगा।
दीपावली से पहले रवि पुष्य योग नक्षत्र में बाजारों में जमकर खरीदारी होगी।
  • सोना-चांदी, वाहन, मकान-दुकान से लेकर कारोबार की नई शुरुआत तक के लिए शुभ संयोग

ग्वालियर. दीपावली की खरीदारी के लिए बाजार सजकर तैयार हैं और इस बार खरीदारी के शौकीनों के लिए ग्रह-नक्षत्रों ने भी शुभ संयोगों की सौगात दी है। दीपावली से पहले 1 नवंबर रविवार को रवि-पुष्यामृत योग का विशेष संयोग बन रहा है। खास बात यह है कि इस दिन सूर्योदय के साथ शुरू होने वाला पुष्य नक्षत्र देर रात तक खरीदारी के लिए शुभ रहेगा। यानी सुबह से लेकर देर रात तक बाजारों में खरीदारी की रौनक जमाने का मौका मिलेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार पुष्य नक्षत्र में खरीदी गई वस्तुएं लंबे समय तक सुख, समृद्धि और स्थायित्व प्रदान करती हैं। ऐसे में सोना-चांदी, आभूषण, इलेक्ट्रॉनिक सामान, वाहन, मकान, दुकान और व्यापार से जुड़ी वस्तुओं की खरीदारी के लिए यह दिन विशेष माना जा रहा है। 1 नवंबर को रवि-पुष्य योग के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग का भी संयोग रहेगा। इसके अलावा दोपहर 2.52 बजे से कालाष्टमी और अहोई अष्टमी का संयोग भी बनेगा। ऐसे में यह दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से भी खास रहेगा।
ज्योतिषाचार्य डॉ.हुकुमचंद जैन के अनुसार 1 नवंबर रविवार को सुबह 5.40 बजे सूर्योदय के साथ ही पुष्य नक्षत्र प्रारंभ हो जाएगा, जो अगले दिन सुबह 4.31 बजे तक रहेगा। रविवार को पुष्य नक्षत्र का संयोग बनने से रवि-पुष्यामृत योग का निर्माण होगा। यह योग खरीदारी और नए कार्यों की शुरुआत के लिए विशेष शुभ माना जाता है। सामान्य तौर पर 27 नक्षत्रों में पुष्य नक्षत्र को अत्यंत बलवान और शुभ फलदायी माना गया है। जिस तरह जंगल में सिंह को सबसे शक्तिशाली माना जाता है, उसी तरह ज्योतिष में पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रों में विशेष स्थान प्राप्त है। इसके बाद 6 नवंबर को धनतेरस पर खरीदारी का महासंयोग पड़ेगा।

बाजार में बहीखातों से लेकर वाहन और मकान तक की खरीदारी
पुष्य नक्षत्र पर नए बहीखाते, कलम और दवात खरीदने की परंपरा है। कई परिवार सोने-चांदी के सिक्के, देवी-देवताओं के यंत्र और प्रतिमाएं खरीदना पसंद करते हैं। इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स, वाहन, इलेक्ट्रिक वाहन और घरेलू उपकरणों की खरीदारी भी होती है। कई लोग इस दिन मकान, फ्लैट, प्लॉट या जमीन से जुड़े सौदों और रजिस्ट्री की शुरुआत के लिए भी मुहूर्त देखते हैं।

पुष्य नक्षत्र में खरीदी गई चीजें क्यों मानी जाती हैं शुभ
पुष्य नक्षत्र को खरीदारी और शुभ कार्यों के लिए खास मानने के पीछे ज्योतिषीय मान्यताएं भी हैं। इस नक्षत्र के देवता देवगुरु बृहस्पति माने जाते हैं, जो ज्ञान, समृद्धि और शुभता के कारक हैं। वहीं इसके दिशा प्रतिनिधि शनि हैं। बृहस्पति की शुभता और शनि के स्थायित्व के प्रभाव के कारण इस नक्षत्र में खरीदी गई वस्तुओं के लंबे समय तक उपयोगी और लाभकारी बने रहने की मान्यता है।

Updated on:
31 Oct 2026, 11:20 AM IST
Published on: