ग्वालियर

Republic day 2018 : शहीद राकेश मिश्रा ने दुश्मनों के छुड़ाए थे छक्के,शहीद से जुड़े ये है रोचक किस्से

देश की रक्षा के लिए बर्फीली पहाडिय़ों पर रहते हुए खाना-पीना भी छोड़ दिया,बर्फ पर शक्कर डालकर दुश्मनों के छुड़ाए छक्के
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Updated: 8 Jan 2018, 4:11 PM IST
 Rakesh
Rakesh Mishra

ग्वालियर/दतिया। मातृभूमि की सेवा से बढ़कर इस जगत में दूसरा कोई और सेवा नहीं है। जब 125 करोड़ से भी अधिक भारतीय अपने परिवार के साथ घरों में रहते हैं, तो हिन्दुस्तान के वीर सपूत दिन-रात सरहदों की रक्षा कर रहे होते हैं। हर सैनिक की यह तमन्ना होती है कि अपने वतन की रक्षा करते-करते मौत को गले लगा ले। इसी जज्बे के साथ दतिया से 17 किलोमीटर दूर स्थित जिगना गांव निवासी राकेश मिश्रा ने बीएसएफ में सूबेदार रहते हुए विदेशी सेनाओं के छक्के छुड़ाए थे। देश की रक्षा के लिए इतना त्यााग किया कि उन्होंने वे दिन भी काटे जब बर्फीली पहाडिय़ों पर रहते हुए उन्हें खाना-पीना नसीब नहीं हुआ को बर्फ पर शक्कर डालकर पेट भरा और बकायदा देश की सुरक्षा में लगे रहे।

जिगना के शूर राकेश मिश्र ने देश की रक्षा में अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। वे सीमा सुरक्षा बल में बतौर सूबेदार मणिपुर में पदस्थ थे। उन्होंने सियाचिन की पहाडिय़ों में रहकर भी देश के लिए युद्ध किया। परिजनों के मुताबिक राकेश मिश्रा देश की सुरक्षा के लिए लड़े गए युद्धों में उन्होंने दुश्मनों की सेना के दांत खट्टे कर दिए थे।

तब उनकी उम्र काफी कम रही थी। बेहतर सेवा के लिए उन्हें मणिपुर की सीमा पर भेजा गया पर यहां ड्यूटी के दौरान उन्हें किसी बीमारी ने घेर लिया और बर्फ के पहाड़ पर रहने के दौरान फैली तमाम तरह की बीमारियों में से मलेरिया की चपेट में आने पर वे वीरगति को प्राप्त हुए।

हालांकि केन्द्र सरकार ने उन्हें शहीद मानते हुए उनके बेटे अमित को नौकरी से नवाजा। इतना ही नहीं शहीद राकेश की पत्नी भी अब इस दुनियां में नहीं है।

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