
ग्वालियर. विश्व हृदय दिवस पर ग्वालियर-चंबल अंचल के लिए दिल से जुड़ी एक ङ्क्षचताजनक तस्वीर सामने आई है। कभी उम्रदराज लोगों की बीमारी माने जाने वाला हार्ट अटैक अब कम उम्र के युवाओं को भी तेजी से अपनी चपेट में ले रहा है। गजराराजा मेडिकल कॉलेज (जीआरएमसी) के कार्डियोलॉजी विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 4-5 साल में 40 वर्ष से कम उम्र के मरीजों की हिस्सेदारी में लगातार बढ़ोतरी हुई है। चार-पांच साल पहले कार्डियोलॉजी में आने वाले 100 मरीजों में करीब 5-6 युवा 40 वर्ष से कम उम्र के होते थे, अब यह संख्या बढ़कर 14 तक पहुंच गई है। यानी कार्डियोलॉजी में आने वाले मरीजों में 40 वर्ष से कम उम्र के युवाओं की हिस्सेदारी ढाई गुना से ज्यादा हो गई है। विशेषज्ञ इसे बदलती जीवनशैली, खानपान, शारीरिक गतिविधियों की कमी और अन्य जोखिम कारकों से जोड़कर देख रहे हैं।
मौत का आंकड़ा भी बढ़ने लगा…
हार्ट अटैक के मरीजों को तुंरत ही अस्पताल पहुंचना चाहिए। कई बार देखने में आया है कि लोग समझ नहीं पाते है और अस्पताल तक पहुंचने में काफी देर हो जाती है। ऐसे में पिछले वर्ष कार्डियोलॉजी में पहुंचने और भर्ती मरीजों में 388 की मौत हुई थी।
युवाओं को भारी पड़ रही ये 4 आदतें
युवाओं के कुछ मामले, दो डॉक्टर भी
केस 1 : युवा डॉक्टर भी बने शिकार… हाल ही में जीआरएमसी के दो युवा डॉक्टर जिनकी उम्र महज 25 से 28 वर्ष के बीच होगी उनको अचानक हार्ट अटैक आ गया। गनीमत यह रही कि समय पर सही इलाज मिलने से दोनों डॉक्टरों की जान बचा ली गई, लेकिन इस घटना ने चिकित्सा जगत को भी सन्न कर दिया था।
केस 2 : 21 साल के युवक की बची जान… मुरैना के एक 21 वर्षीय युवक को अचानक गंभीर सीने में दर्द और हार्ट अटैक की शिकायत हुई। परिवार तुरंत उसे कार्डियोलॉजी लेकर पहुंचा, जहां समय रहते डॉक्टरों ने उसकी जान बचा ली। इसमें खास बात यह है कि युवक को कभी कोई परेशानी महसूस तक नहीं हुई थी।
हर साल 20 हजार से ज्यादा मरीज
जीआरएमसी के कार्डियोलॉजी विभाग में हर साल 20 हजार से अधिक मरीज ओपीडी में जांच और परामर्श के लिए पहुंच रहे हैं। अस्पताल में हर साल 13,600 से अधिक मरीजों की इको जांच की जा रही है, जिससे उनके दिल की कार्यप्रणाली और पंङ्क्षपग क्षमता का आकलन किया जाता है।