
ग्वालियर. ग्वालियर से झांसी के बीच रेल मार्ग से रोजाना सफर करने वाले लाखों यात्रियों के लिए राहत भरी खबर है। व्यस्त रेलखंड पर अब ट्रेनें पूरी तरह से अत्याधुनिक और स्वदेशी सुरक्षा तकनीक कवच की निगरानी में दौड़ेंगी। उत्तर मध्य रेलवे के झांसी मंडल ने ग्वालियर-झांसी के बीच 97.1 किलोमीटर लंबे रेलखंड पर मानक कवच प्रणाली की कमीशनिंग का कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस स्वदेशी तकनीक के लागू होने से न केवल ट्रेनों के संचालन में सुरक्षा का दायरा बढ़ेगा, बल्कि मानवीय भूल के कारण होने वाले रेल हादसों की आशंका पर भी काफी हद तक लगाम लगेगी। रेलवे अधिकारियों के अनुसार कवच प्रणाली का सबसे बड़ा लाभ यह है कि ट्रेन संचालन के दौरान यदि किसी आपात स्थिति में लोको पायलट सिग्नल या अन्य तकनीकी निर्देशों को चूक जाता है, तो यह सिस्टम तुरंत एक्टिव हो जाता है। यह प्रणाली लोको पायलट को विजुअल और ऑडियो अलर्ट देने के साथ-साथ, आवश्यकता पड़ने पर ट्रेन की स्पीड को स्वत: नियंत्रित (कंट्रोल) करने की पूरी क्षमता रखती है।
97.1 किमी. में बिछाया 1,596 आरएफआइडी टैग्स का जाल
-इस हाईटेक सुरक्षा प्रणाली को जमीन पर उतारने के लिए रेलवे ने तकनीकी स्तर पर व्यापक इंतजाम किए हैं। ग्वालियर से झांसी के बीच 97.1 किमी के इस ट्रैक पर कुल 1,596 आरएफआईडी टैग लगाए गए हैं।
-ये टैग ट्रैक पर दौड़ती ट्रेन की सटीक स्थिति, गति और उसकी पहचान से जुड़ा हर अपडेट पल-पल सिस्टम को उपलब्ध कराते हैं। इसी हाईटेक मैकेनिज्म के जरिए ट्रेन के मूवमेंट पर पैनी नजर रखी जाती है।
-ग्वालियर और वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी जंक्शन को छोड़कर इस पूरे मध्यवर्ती रेलखंड पर मानक कवच की कमीशङ्क्षनग सफलतापूर्वक कर दी गई है।