ग्वालियर

‘संजीवनी’ खुद बीमार, ग्वालियर में 8 क्लीनिकों में डॉक्टर नहीं, ताले लटकने से बड़े अस्पतालों पर बढ़ा मरीजों का बोझ

शहर के हर वार्ड में आम जनता को घर के पास ही मुफ्त और बेहतर इलाज मुहैया कराने के संकल्प के साथ शुरू किए गए मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक’ आज खुद बीमार नजर आ रहे हैं। स्टाफ और डॉक्टरों की भारी कमी

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Jun 03, 2026
sanjivani hospital gwalior
sanjivani hospital gwalior

ग्वालियर. शहर के हर वार्ड में आम जनता को घर के पास ही मुफ्त और बेहतर इलाज मुहैया कराने के संकल्प के साथ शुरू किए गए मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक’ आज खुद बीमार नजर आ रहे हैं। स्टाफ और डॉक्टरों की भारी कमी के चलते स्वास्थ्य विभाग का यह ड्रीम प्रोजेक्ट दम तोड़ रहा है। नतीजा यह है कि जिन मरीजों को छोटी-मोटी बीमारियों के लिए घर के पास इलाज मिलना चाहिए था, वे आज जयारोग्य , जिला और सिविल अस्पतालों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार इस बदहाली से वाकिफ तो हैं, लेकिन व्यवस्था सुधारने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे।

ड्यूटी के नाम पर खानापूर्ति कर रहे

शहर के कुल 48 संजीवनी क्लीनिकों में से 8 में स्थाई डॉक्टर ही मौजूद नहीं हैं। विभाग यहां एक-दो दिन छोडकऱ वैकल्पिक डॉक्टरों की ड्यूटी लगाकर महज खानापूर्ति कर रहा है। यानी जिस दिन साहब आए तो अस्पताल खुला, वरना ताला लटका रहता है। इस अव्यवस्था का सीधा असर अंचल के बड़े अस्पतालों पर पड़ रहा है, जहां ओपीडी में मरीजों की बेतहाशा भीड़ बढ़ गई है।

लाइव रिपोर्ट… कांच मिल क्लीनिक पर पदस्थ डॉक्टर फरवरी से ही क्लीनिक नहीं आ रहे

मंगलवार दोपहर 12:30 बजे जब पत्रिका रिपोर्टर ने कांच मिल क्षेत्र के संजीवनी क्लीनिक का रियलिटी चेक किया, तो नजारा चौंकाने वाला था। यहां न डॉक्टर थे और न ही नर्सिंग स्टाफ, कुर्सी पर सिर्फ एक कंप्यूटर ऑपरेटर बैठा मिला। पता चला कि यहां पदस्थ डॉक्टर आशुतोष आर्य का पीजी में चयन होने के बाद वे फरवरी से ही क्लीनिक नहीं आ रहे हैं। तब से विभाग यहां किसी दूसरे डॉक्टर की तैनाती नहीं कर पाया है। स्थानीय निवासियों को अब बीपी चेक कराने या खांसी की दवा लेने के लिए भी मीलों दूर बड़े अस्पतालों में भटकना पड़ रहा है।

इन क्षेत्रों के क्लीनिकों में स्वास्थ्य सेवाएं ठप

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, शहर की पीएचई कॉलोनी, तृप्ति नगर (नदी पार टाल), सागर ताल, झाडू वाला मोहल्ला, 50 क्वाटर हजीरा, डीडी नगर, रायरू और कांच मिल क्षेत्र के संजीवनी क्लीनिकों में डॉक्टरों का टोटा है। इन केंद्रों से डॉक्टर या तो नौकरी छोडकऱ जा चुके हैं या इस्तीफा दे चुके हैं। विभाग का दावा है कि ऑन कॉल डॉक्टर भेजे जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि ये क्लीनिक सिर्फ शो-पीस बनकर रह गए हैं।

इनका कहना

संजीवनी क्लीनिक पर डॉक्टरों की कमी को लेकर शासन स्तर से चर्चा की जा रही है। बहुत जल्द ही डॉक्टरों की व्यवस्था की जाएगी।
डॉ. सचिन श्रीवास्तव, सीएमएचओ

Published on:
03 Jun 2026 05:35 pm