
ग्वालियर। उच्च न्यायालय ने एससीएसटी एक्ट के मामले में आरोपी अतेन्द्र सिंह रावत के अग्रिम जमानत आवेदन को यह कहते हुए स्वीकार कर लिया कि आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया एससीएसटी एक्ट का मामला नहीं बनता है। न्यायालय ने आरोपी को सशर्त अग्रिम जमानत दी है। इस मामले में आरोपी द्वारा अपने अधिवक्ता अतुल गुप्ता के माध्यम से विशेष न्यायालय द्वारा आरोपी के अग्रिम जमानत आवेदन को खारिज करने के खिलाफ यह अपील प्रस्तुत की गई थी।
उच्च न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा बालाघाट में एससीएसटी एक्ट में जांच के बाद ही गिरफ्तार किए जाने की घोषणा के आधार पर उसके अग्रिम जमानत के आवेदन को स्वीकार किया जाए। मुख्यमंत्री के इस बयान पर शासन ने अदालत में कहा था कि मुख्यमंत्री का बयान चुनावी है इसका कोई वैधानिक महत्व नहीं है।
वहीं शासन का यह भी कहना था इस मामले में हाल ही में लागू किए गए अधिनियम के प्रावधान ही लागू होंगे। शासन के विस्तृत जवाब पर न्यायालय ने यह फैसला दिया है। न्यायमूर्ति आनंद पाठक ने इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता वीके सक्सेना से अपना अभिमत देने का आग्रह किया था। इस पर उन्होंने न्यायालय से कहा था कि जब जांच अधिकारी को यह अधिकार है कि यह संज्ञेय अधिकार है या नहीं इस पर निर्णय कर सकता है तो फिर न्यायालय भी इस संबंध में निर्णय ले सकता है।
न्यायालय ने आरोपी को अग्रिम जमानत का लाभ देते हुए कहा कि वह प्रकरण की जांच में पूर्ण सहयोग करेगा। फरियादी को धमकी नहीं देगा तथा बिना न्यायालय की अनुमति के वह विदेश नहीं जा सकेगा, वह पीडि़त से मिलने का प्रयास नहीं करेगा। आरोपी तथ्यों से छेड़छाड़ भी नहीं करेगा।
यह है मामला
अतेन्द्र सिंह के खिलाफ आशा कार्यकर्ता ने 19 मई 2018 को करैरा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि आरोपी उससे पैसे दिलाने के एवज में अनैतिक संबंध बनाने का दबाव डाल रहा है। अपीलकर्ता के अधिवक्ता अतुल गुप्ता का कहना था कि दुर्भावना के कारण इस मामले में अगस्त १७ की घटना बताकर एक साल बाद एफआईआर दर्ज कराई गई है।