
ग्वालियर। सेप्सिस (संक्रमण) बच्चों में तेजी से बढ़ रहा है। इसका खुलासा एसएनसीयू ऑनलाइन सॉफ्टवेयर में दर्ज डाटा का तुलनात्मक विश्लेषण करने पर हुआ है।
रिपोर्ट के मुताबिक जिला चिकित्सालय के प्रसव केन्द्रों से एसएनसीयू में भर्ती होने वाले नवजात शिशुओं में सेप्सिस के प्रकरणों की संख्या राज्य के औसत 9.9 से दो गुना से अधिक है। जिला चिकित्सालय की 6 माह की रिपोर्ट में सेप्सिस का औसत 26.5 है। सेप्सिस का औसत बढऩा बच्चों की मौत का कारण भी बन रहा है।
बच्चों में सेप्सिस के सबसे ज्यादा मामले शाजापुर में सामने आए हैं। यहां सेप्सिस का औसत ३३ प्रतिशत है। ग्वालियर जिला चिकित्सालय दूसरे नंबर है। बढ़ते सेप्सिस के प्रकरणों को लेकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संचालक डॉ. बीएन चौहान ने सिविल सर्जन और स्त्री रोग विशेषज्ञ सह प्रसूति कक्ष इंचार्ज जिला चिकित्सालय को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। वर्ष 2017-18 अप्रैल से सितंबर माह के डाटा से यह रिपोर्ट सामने आ सकी।
यह होता है रोग से
इसमें रोग-प्रतिरोधक प्रणाली अत्यधिक सक्रिय हो जाती है। बीमारी की शुरुआत शरीर के किसी हिस्से में खरोंच, कटने, कीड़े के काटने आदि के दौरान संक्रमण से होती है। इससे ब्लड सर्कुलेशन बिगड़ जाता है और शरीर में सूजन आ जाती है। ब्लड के क्लॉट (थक्के) भी बनने लगते हैं। इससे शरीर के अंगों को पर्याप्त ऑक्सीजन व पोषक तत्व नहीं मिल पाते।
बच्चों को दो स्टेज में होती है सेप्सिस
स्टेज-1 : यह जन्म के 3 दिन के अंदर होती है। यह मैटरनल फैक्टर, प्रसव केंद्र का वातावरण, असुरक्षित डिलेवरी के कारण सेप्सिस होने की आशंका बढ़ जाती है।
स्टेज-2 : जन्म के 3 दिन बाद होती है। प्राय जन्म के समय जब लोग नवजात को उठाते हैं तो उनके हाथ में संक्रमण होता है। इससे बीमारी होने का खतरा रहता है।
जिला सेप्सिस प्रतिशत
शाजापुर 33
ग्वालियर 26.5
हरदा 24
पन्ना 21.1
देवास 19.7
इनका कहना
बच्चों में सेप्सिस के प्रकरणों में वृद्धि होना चिंताजनक है। इसके रोकने के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों को दिशा निर्देश दिए गए हैं।
डॉ.वीके गुप्ता, सिविल सर्जन