ग्वालियर

ट्रेनों के स्लीपर कोच भट्टी की तरह तप रहे, एसी की पर्याप्त कूलिंग नहीं, हर दिन दर्जन भर यात्री बीमार

सूरज के तीखे तेवरों ने इन दिनों आम जनजीवन को झुलसा कर रख दिया है। आसमान से बरसती आग के कारण पारा लगातार 40 डिग्री के पार बना हुआ है। जिसका सबसे बुरा असर रेल यात्रा करने वाले मुसाफिरों पर पड़ रहा है।
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Updated: 17 May 2026, 6:42 PM IST
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ग्वालियर . सूरज के तीखे तेवरों ने इन दिनों आम जनजीवन को झुलसा कर रख दिया है। आसमान से बरसती आग के कारण पारा लगातार 40 डिग्री के पार बना हुआ है। जिसका सबसे बुरा असर रेल यात्रा करने वाले मुसाफिरों पर पड़ रहा है। हालात यह हैं कि लंबी दूरी की ट्रेनों के स्लीपर और जनरल कोच भट्टी की तरह तप रहे हैं, वहीं एसी कोच के यात्री भी इस भीषण गर्मी से परेशान हैं। उबलते कोचों के कारण ट्रेनों में हर दिन दर्जन भर यात्री गंभीर रूप से बीमार हो रहे हैं। एसी नहीं दे रहे ठंडक, स्लीपर में लू के थपेड़े… ट्रेनों में सफर कर रहे यात्रियों के लिए यह समय किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं है। जनरल और स्लीपर कोचों में खिड़कियों से आने वाली हवा राहत देने के बजाय लू के थपेड़ों की तरह बदन को झुलसा रही है। वहीं एसी कोचों की स्थिति भी जुदा नहीं है। अत्यधिक तापमान के कारण ट्रेनों के एसी हांफ रहे हैं और पर्याप्त कूङ्क्षलग नहीं कर पा रहे हैं। बंद शीशों के बीच उमस और गर्मी से एसी कोच के यात्री भी पसीने-पसीने हो रहे हैं।

एक ही दिन में आ रहे 8 से 10 डॉक्टर कॉल

कोचों के भीतर गर्मी से यात्री तेजी से डिहाइड्रेशन, तेज बुखार, उल्टी और दस्त का शिकार हो रहे हैं। ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर हर दिन औसतन 8 से 10 इमरजेंसी 'डॉक्टर कॉल' आ रहे हैं। जैसे ही कोई ट्रेन स्टेशन पर रुकती है, रेलवे के डॉक्टरों की टीम बीमार यात्रियों को प्राथमिक उपचार देने के लिए प्लेटफॉर्म पर मुस्तैद दिखाई देती है। गुरुवार- शुक्रवार को जीटी एक्सप्रेस के ए- 2, ओखा एक्सप्रेस के बी- 6, श्री माता वैष्णो देवी कटरा-जबलपुर एक्सप्रेस के बी- 1, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी- बांद्रा टर्मिनस में बी-2, महाकौशल एक्सप्रेस के एम- 1, पंजाब मेल के ए- 1, मध्य प्रदेश संपर्क क्रांति के एस-3 और उत्कल एक्सप्रेस के बी- 5 में यात्री बीमार हुए।

सफर में रखें खास ध्यान

बीमार होने वाले अधिकांश यात्री लंबी दूरी का सफर करने वाले हैं। डॉक्टरों ने यात्रियों को सलाह दी है कि सफर के दौरान केवल उबला या सीलबंद पानी ही पिएं। अपने साथ ओआरएस का घोल या ग्लूकोज जरूर रखें और थोड़ी-थोड़ी देर में इसका सेवन करते रहें, ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। स्टेशनों पर मिलने वाले खुले और बासी खाद्य पदार्थों से पूरी तरह परहेज करें।
डॉ हिमांशु शर्मा, रेलवे डॉक्टर

Updated on:
17 May 2026, 6:42 PM IST
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