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ग्वालियर. मध्यप्रदेश के व्यापारियों और करदाताओं के लिए यह खबर किसी बड़ी राहत से कम नहीं है। राज्य के वाणिज्यिक कर विभाग में एक ऐसा यू-टर्न आया है जो टैक्सपेयर्स के हक में रहेगा। अब तक अगर कोई अधिकारी मनमानी करता था, तो उसका खामियाजा करदाता को भुगतना पड़ता था। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। वाणिज्यिक कर आयुक्त ने विभाग के भीतर एक इंटरनल रिव्यू मैकेनिज्म लागू कर दिया है, जिससे नीचे के अधिकारियों की मनमर्जी पर पूरी तरह लगाम लग जाएगी। सरल शब्दों में कहें तो, विभाग अब अपने ही अधिकारियों के फैसलों का एक्स-रे करेगा ताकि ईमानदारी से टैक्स भरने वालों को कोई परेशान न कर सके।
जाने नए सिस्टम को (3 कड़े नियम, जिनसे बदलेगी टैक्स की दुनिया) - 7 दिनों में मुख्यालय करेगा जांच : अब रिफंड, टैक्स में कमी या डिमांड में भारी राहत वाले हर बड़े आदेश का 7 दिनों के भीतर हेडक्वार्टर में कड़ा टेस्ट होगा। इसके लिए एक स्पेशल डायरी कक्ष बनाया गया है जो पोर्टल के जरिए हर फाइल पर बाज जैसी नजर रखेगा।
जिस अधिकारी ने आपके मामले में फैसला सुनाया है, वह खुद उसकी दोबारा जांच नहीं कर पाएगा। इसके लिए किसी दूसरे क्षेत्र के अधिकारी को रैंडमली (लॉटरी सिस्टम की तरह) चुना जाएगा। यानी, मिली भगत का खेल अब खत्म।
कमिश्नर ने साफ कर दिया है कि अगर किसी अधिकारी ने गड़बड़ी की या समय पर जानकारी छुपाई, तो उसे गंभीर अनियमितता मानकर सीधे सस्पेंड या अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
अब कोई भी अधिकारी अपनी मनमर्जी से करदाता के खिलाफ गलत फैसला नहीं थोप पाएगा, क्योंकि उसे पता है कि ऊपर बैठे साहब भी उसकी फाइल देख रहे होंगे।
पुनरीक्षण (रिवीजन - धारा 108) : विभाग के पास अब स्वप्रेरणा से किसी भी पुराने आदेश को दोबारा खोलने की शक्ति है। एसओपी वाणिज्यिक कर विभाग ने अधिकारियों के पालन के लिए इस एसओपी को जारी किया है। अब देखना यह है कि इससे करदाताओं को कितना लाभ पहुंचता है। एसओपी के मुताबिक अधिकारियों की मनमानी पर अंकुश लगेगा।
अश्विन लखोटिया, अध्यक्ष, एमपी टैक्स लॉ बार एसोसिएशन
Updated on:
17 May 2026 05:45 pm
Published on:
17 May 2026 05:42 pm
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