
सरकारी विभागों में फाइलें अटकाने के रवैये पर कोर्ट नाराज, 888 दिन की देरी पर कहा-‘एक टेबल से दूसरी टेबल तक घूमती रहीं फाइलें’
ग्वालियर. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने सरकारी विभागों में फाइलों को अटकाने और प्रशासनिक ढीले रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया, अधिकारियों की लापरवाही और सुस्ती को अपील में हुई देरी को माफ करने का वैध आधार नहीं माना जा सकता। इसके साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा दायर की गई 888 दिन की देरी वाली एक रिट अपील को खारिज कर दिया है।
जस्टिस जीएस अहलूवालिया और जस्टिस पुष्पेंद्र यादव की बैंच के समक्ष राज्य सरकार ने हेमंत ङ्क्षसह यादव के मामले में ङ्क्षसगल बेंच के 21 अगस्त 2023 के आदेश के खिलाफ एक रिट अपील दायर की थी। सरकार की ओर से इस अपील को पेश करने में 888 दिन का लंबा समय लगा , जिसके लिए कोर्ट में देरी माफी (कंडोनेशन ऑफ डिले) का आवेदन लगाया गया था। पुलिस विभाग के मुताबिक, विभाग को ङ्क्षसगल बेंच के आदेश की जानकारी 12 अगस्त 2024 को तब मिली जब प्रतिवादी ने खुद आवेदन दिया। इसके बाद फाइल 23 अगस्त 2024 को पुलिस मुख्यालय भेजी गई और 29 अगस्त 2024 को महाधिवक्ता कार्यालय से कानूनी राय मांगी गई। राय मिलने के बाद भी फाइल विभाग में एक टेबल से दूसरी टेबल पर घूमती रही। आखिरकार, सक्षम प्राधिकारी ने 27 फरवरी 2026 को अपील की अनुमति दी और एसपी ग्वालियर को पत्र भेजा गया, जिसके बाद 25 अप्रेल 2026 को कोर्ट में अपील दायर हो सकी।
कोर्ट की तीखी टिप्पणी: ‘प्रशासनिक सुस्ती को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा’
सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा, विभाग ने यह साफ नहीं किया कि ङ्क्षसगल बेंच के आदेश के बाद एक साल तक इस पर कोई संज्ञान क्यों नहीं लिया गया। कानूनी राय मिलने के बाद भी सरकार को अपील दायर करने में डेढ़ साल से अधिक का समय क्यों लगा, इसका भी ठोस स्पष्टीकरण नहीं है।
लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई जरूरी
जब तक सरकार अपने लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और उन्हें दंडित नहीं करती, तब तक केवल अधिकारियों का फाइल दबाकर बैठे रहना देरी माफी का आधार नहीं हो सकता।
आम नागरिक परेशान
सरकारी सुस्ती और अंतहीन मुकदमेबाजी के कारण एक सीमित साधनों वाला आम नागरिक परेशान होता है और उसके पक्ष में आए अदालती फैसलों का लाभ उसे समय पर नहीं मिल पाता।
गाइडलाइंस की अनदेखी
राज्य सरकार ने समय पर अपील दायर करने के लिए साल 2018 और अप्रैल 2026 में गाइडलाइंस जारी की हैं, लेकिन इसके बावजूद अधिकारी बेहद कैजुअल तरीके से आवेदन दाखिल कर रहे हैं।
Updated on:
17 May 2026 06:20 pm
Published on:
17 May 2026 06:18 pm
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