ग्वालियर

करदाताओं को दफ्तरों के चक्कर लगाने से मिलेगी राहत, वर्चुअल होगी सुनवाई

मध्यप्रदेश के व्यापारियों और करदाताओं के लिए यह खबर किसी बड़ी राहत से कम नहीं है। राज्य के वाणिज्यिक कर विभाग में एक ऐसा यू-टर्न आया है जो टैक्सपेयर्स के हक में रहेगा। अब तक अगर

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May 17, 2026
tax news

ग्वालियर. मध्यप्रदेश के व्यापारियों और करदाताओं के लिए यह खबर किसी बड़ी राहत से कम नहीं है। राज्य के वाणिज्यिक कर विभाग में एक ऐसा यू-टर्न आया है जो टैक्सपेयर्स के हक में रहेगा। अब तक अगर कोई अधिकारी मनमानी करता था, तो उसका खामियाजा करदाता को भुगतना पड़ता था। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। वाणिज्यिक कर आयुक्त ने विभाग के भीतर एक इंटरनल रिव्यू मैकेनिज्म लागू कर दिया है, जिससे नीचे के अधिकारियों की मनमर्जी पर पूरी तरह लगाम लग जाएगी। सरल शब्दों में कहें तो, विभाग अब अपने ही अधिकारियों के फैसलों का एक्स-रे करेगा ताकि ईमानदारी से टैक्स भरने वालों को कोई परेशान न कर सके।

जाने नए सिस्टम को (3 कड़े नियम, जिनसे बदलेगी टैक्स की दुनिया) - 7 दिनों में मुख्यालय करेगा जांच : अब रिफंड, टैक्स में कमी या डिमांड में भारी राहत वाले हर बड़े आदेश का 7 दिनों के भीतर हेडक्वार्टर में कड़ा टेस्ट होगा। इसके लिए एक स्पेशल डायरी कक्ष बनाया गया है जो पोर्टल के जरिए हर फाइल पर बाज जैसी नजर रखेगा।

अपना फैसला, खुद नहीं जांच सकेंगे अफसर

जिस अधिकारी ने आपके मामले में फैसला सुनाया है, वह खुद उसकी दोबारा जांच नहीं कर पाएगा। इसके लिए किसी दूसरे क्षेत्र के अधिकारी को रैंडमली (लॉटरी सिस्टम की तरह) चुना जाएगा। यानी, मिली भगत का खेल अब खत्म।

लापरवाही पर सीधे एक्शन

कमिश्नर ने साफ कर दिया है कि अगर किसी अधिकारी ने गड़बड़ी की या समय पर जानकारी छुपाई, तो उसे गंभीर अनियमितता मानकर सीधे सस्पेंड या अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

करदाताओं को तीन बड़े फायदे पारदर्शिता और जवाबदेही

अब कोई भी अधिकारी अपनी मनमर्जी से करदाता के खिलाफ गलत फैसला नहीं थोप पाएगा, क्योंकि उसे पता है कि ऊपर बैठे साहब भी उसकी फाइल देख रहे होंगे।

  • डिजिटल मॉनिटङ्क्षरग : सारा काम वेब पोर्टल पर डिजिटल रजिस्टर के जरिए होगा। अफसरों द्वाराफाइल दबाकर बैठने और रिश्वतखोरी का ’लेती-देती’ वाला दौर अब गुजरे जमाने की बात हो जाएगा।
  • दफ्तरों के चक्करों से आजादी : अगर आपके मामले का पुनरीक्षण (रिवीजन) होना भी है, तो अब उसकी सारी सुनवाई वर्चुअल मोड (वीडियो कॉन्फ्रेंङ्क्षसग) पर होगी। करदाता को कार्यालय की सीढिय़ां नहीं चढऩा पड़ेंगी।

अपील का त्रिस्तरीय चक्रव्यूह: विभाग अब हर मोर्चे पर मुस्तैद

  • प्रथम अपील (धारा 107) : अगर कमिश्नर को लगता है कि नीचे के अफसर का कोई आदेश गलत है, तो वो 6 महीने के भीतर उसके खिलाफ अपील कर सकेंगे। इसके लिए एक प्रभारी अधिकारी तैनात होगा जो कोर्ट में विभाग का पक्ष रखेगा।
  • द्वितीय अपील (धारा 112) : मामला जीएसटी अपीलीय अधिकरण (जीएसटीएटी) तक भी जाएगा। वैसे तो 20 लाख रुपए से कम के मामलों में विभाग अपील नहीं करेगा, लेकिन अगर मामला कानून को समझने या भविष्य के लिहाज से जरूरी हुआ, तो विभाग पाई-पाई के लिए भी कानूनी लड़ाई लड़ेगा।

पुनरीक्षण (रिवीजन - धारा 108) : विभाग के पास अब स्वप्रेरणा से किसी भी पुराने आदेश को दोबारा खोलने की शक्ति है। एसओपी वाणिज्यिक कर विभाग ने अधिकारियों के पालन के लिए इस एसओपी को जारी किया है। अब देखना यह है कि इससे करदाताओं को कितना लाभ पहुंचता है। एसओपी के मुताबिक अधिकारियों की मनमानी पर अंकुश लगेगा।
अश्विन लखोटिया, अध्यक्ष, एमपी टैक्स लॉ बार एसोसिएशन

Updated on:
17 May 2026 05:45 pm
Published on:
17 May 2026 05:42 pm
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