ग्वालियर

कॉरपोरेट जगत में ‘टाइगर स्टेट’ की दहाड़, कंपनी पंजीयन में MP ने बड़े राज्यों को पछाड़ा

कॉरपोरेट मंत्रालय (एमसीए) के ताजा आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि 2025 भारत के व्यापारिक इतिहास का सबसे स्वर्णिम वर्ष रहा है। देश में कुल 2.54 लाख नई कंपनियां पंजीकृत हुईं, जो 2024 के मुकाबले 46 फीसदी की विशाल छलांग है।

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Ministry of Corporate Affairs of India

मध्य प्रदेश, जिसे अब तक केवल जंगलों और पर्यटन के लिए जाना जाता था, अब भारत के नए 'कॉरपोरेट हब' के रूप में उभर रहा है। वर्ष 2025 के आंकड़ों ने देश के बड़े-बड़े औद्योगिक दिग्गजों को चौंका दिया है। जहां देश की आर्थिक राजधानी महाराष्ट्र और स्टार्टअप हब बेंगलुरु जैसे राज्य अपनी रफ्तार बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं मध्य प्रदेश ने ईज ऑफ डूइंग के मामले में 41 फीसदी की रिकॉर्ड वृद्धि के साथ सबको पीछे छोड़ दिया है।

कॉरपोरेट मंत्रालय (एमसीए) के ताजा आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि 2025 भारत के व्यापारिक इतिहास का सबसे स्वर्णिम वर्ष रहा है। देश में कुल 2.54 लाख नई कंपनियां पंजीकृत हुईं, जो 2024 के मुकाबले 46 फीसदी की विशाल छलांग है। लेकिन असली कहानी मध्य प्रदेश में लिखी जा रही है। करीब 7,000 नई कंपनियों के पंजीयन के साथ एमपी ने वह कर दिखाया जो दिल्ली (3 फीसदी), बेंगलुरु (28 फीसदी) और महाराष्ट्र (32 फीसदी) जैसे धुरंधर भी नहीं कर पाए।


राज्यवार कंपनियों का पंजीकरण

राज्य 2024 2025 प्रतिशत
मध्यप्रदेश 4839 6828 41 फीसदी
उत्तरप्रदेश 18895 23371 24 फीसदी
महाराष्ट्र 30216 40025 32 फीसदी
कर्नाटक 13237 16916 28 फीसदी
दिल्ली 15616 15155 3 फीसदी
हरियाणा 9095 9378 3 फीसदी
छत्तीसगढ़ 1603 2120 32 फीसदी


(नोट - सभी आंकड़े कॉरपोरेट मंत्रालय (एमसीए) पोर्टल से)


इसलिए बदला एमपी का मिजाज

  1. कम लागत : महानगरों की तुलना में मध्य प्रदेश में ऑफिस स्पेस, मैन पॉवर और अन्य परिचालन लागतें काफी कम हैं।
  2. सरकारी सरलीकरण : 2016 में स्थापित सेंट्रल रजिस्ट्रेशन सेंटर (सीआरसी) ने कंपनी बनाने की प्रक्रिया को इतना आसान कर दिया है कि अब कंपनी का नाम मात्र 1 दिन में रिजर्व और पूरा रजिस्ट्रेशन 2 दिनों में भी संभव है।
  3. एक खिडक़ी, दस फायदे : अब उद्यमियों को पैन, टैन, इपीएफओ, इएसआइसी और बैंक अकाउंट के लिए अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ते। एक ही फॉर्म से सब कुछ 'डिजिटल' हो जाता है।

चुनौतियों के बीच सफलता : स्टाम्प ड्यूटी का स्पीड ब्रेकर

इतनी शानदार जीत के बावजूद, एक कड़वा सच यह भी है कि मध्य प्रदेश में कंपनी पंजीयन पर लगने वाली स्टाम्प ड्यूटी दूसरे राज्यों की तुलना में सबसे अधिक है। भारत में 20.4 लाख कंपनी पंजीकृत है जिनमें से मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी मात्र 2.5 फीसदी की ही है। स्टाम्प ड्यूटी अधिक होने के कारण मध्य प्रदेश में यह गति धीमी है, ऐसे में सरकार को इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है, इस स्टाम्प ड्यूटी को अगर 30-40 फीसदी तक कम किया जाता है तो मध्य प्रदेश में कंपनी की विकास दर 41 से बढकऱ 50-60 फीसदी तक जा सकती है एवं राष्ट्रीय स्तर पर 2.5 फीसदी से यह आंकड़ा 8-10 फीसदी तक पहुंच सकता है।

एक्सपर्ट व्यूः स्पीड बढ़ी पर बाधाएं अब भी बरकरार

चार्टर्ड अकाउंटेंट सीए सुरभि जैन के अनुसार, सरकार ने 2016 से प्रक्रिया को पेपरलेस और पारदर्शी बनाकर जो बीज बोया था, वह अब फसल बनकर सामने आ रहा है। 10-15 दिन का काम अब 2-3 दिन में हो रहा है, जो उद्यमियों के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन है।

Updated on:
26 Feb 2026 06:29 pm
Published on:
26 Feb 2026 11:16 am
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