मुनिश्री के सानिध्य में 64 रिद्धि विधान पूजन 01 जनवरी 2022 नववर्ष में आयोजित होगा।
ग्वालियर। इमारत जितनी भव्य और विशाल होती है उसकी नींव भी उतनी गहरी होती है। जीवन की धरती पर धर्म की इमारत ख़डी करने के लिए मानवता की गहरी नींव चाहिए। जिस व्यक्ति का हृदय मानवता के सद्गुणों से शून्य है उस व्यक्ति के द्वारा किए गए धार्मिक क्रियाकलाप सार्थक परिणाम देने में समर्थ नहीं हैं। यह विचार राष्ट्रसंत मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज ने आज मंगलवार को नई सड़क स्थित चंपाबाग धर्मशाल में धर्मसाभ को संबोधित करते हुए कही। मंच पर मुनिश्री विजयेश सागर महाराज, मुनिश्री विनिबोध सागर महाराज व ऐलक श्री विनियोग सागर महाराज मौजूद थे।
मुनिश्री ने कहा कि हृदय की पवित्रता ही धर्म का आधार है अत: व्यक्ति को अपने हृदय को शुद्ध बनाना चाहिए। हृदय की मलिनता धर्म की तेजस्विता को ख़त्म कर देती है। धर्म की साधना करने के पूर्व मानवता के सद्गुणों का विकास बेहद जरुरी है। मानवता की नींव पर ही धार्मिकता का महल ख़डा होता है। इस मौके पर विनय कासलीवाल, पंकज बाकलीवाल, विजय जैन, अनिल जैन, प्रकाशचंद जैन, राजीव जैन, रोहित जैन, विहर्ष युवा मंडल,आदि मौजूद थे। जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज के प्रतिदिन 09:00 बजे से मंगल प्रवचन नई सड़क स्थित चंपाबाग धर्मशाला में होंगे।
धन की आवश्यकता को नकारा नहीं जा सकता।
मुनिश्री ने कहा कि गृहस्थ जीवन में धन की आवश्यकता को नकारा नहीं जा सकता। अर्थ के बिना सब व्यर्थ है। मगर धन का उपार्जन न्याय नीति से होना चाहिए। अन्याय से अर्जित धन जीवन में मुसीबतों की फौज लेकर आता है। जो व्यक्ति पापकर्म करके धन कमाते हैं उनका यह लोक शोक और दुखमय होता है और परलोक में नरक आदि दुर्गति के मेहमान बनते हैं। इस सत्य को दृष्टि के समक्ष रखकर ही जीवन के स़फर को तय करना चाहिए।