ग्वालियर

पेड़ों का ट्रांसप्लांट सफल नहीं, महंगा भी पड़ रहा, इसलिए विशेष पेड़ों को ही शिफ्ट किया जाना चाहिए

हाईकोर्ट युगल पीठ में उस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी, जिसमें कोर्ट ने थाटीपुर पुनर्घनत्वीकरण योजना के तहत ट्रांसप्लांट किए पेड़ों की रिपोर्ट मांगी थी। कमेटी ने बताया है कि पेड़ों को ट्रांसप्लांट करना कारगर नहीं है।

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Aug 19, 2025
Thatipur Re-densification Scheme

हाईकोर्ट युगल पीठ में उस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी, जिसमें कोर्ट ने थाटीपुर पुनर्घनत्वीकरण योजना के तहत ट्रांसप्लांट किए पेड़ों की रिपोर्ट मांगी थी। कमेटी ने बताया है कि पेड़ों को ट्रांसप्लांट करना कारगर नहीं है। बड़े व प्रमुख पेड़ हैं, वह सूख गए गए हैं। ट्रांसप्लांट काफी महंगा भी पड़ा है। एक पेड़ के ट्रांसप्लांट पर 4 हजार से लेकर 45 हजार रुपए तक खर्च किए गए हैं। इसलिए ट्रांसप्लांट की जगह एक पेड़ काटने के बदले में 10 पौधे लगाने की अनुमति देना चाहिए। ट्रांसप्लांट सिर्फ उसी पेड़ को किया जाना चाहिए, जो विशेष महत्व का है। किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति ने पेड़ लगाया है और उसे बचाना जरूरी है। विशेष प्रजाति का पेड़ है। विलुप्त होने की कगार पर है। इन पेड़ों को ट्रांसप्लांट किया जाना चाहिए। याचिका की सुनवाई 8 सितंबर को होगी।

दरअसल थाटीपुर पुनर्घनत्वीकरण योजना का काम चंबल कॉलोनी में किया जा रहा है। चंबल कॉलोनी में वर्षों पुराने छायादार व फलदार पेड़ खड़े हुए थे, जिसको लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई। हाईकोर्ट ने पेड़ों की गिनती कराई। इसकी रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की गई। कुल 3224 पेड़ योजना के एरिया में मिले। इसमें से 329 पेड़ ट्रांसप्लांट करने का आदेश दिया गया। 71 पेड़ों को काटने की अनुमति दी गई। हाउसिंग बोर्ड ने 329 में 256 पेड़ ट्रांसप्लांट किए। साथ ही हाउसिंग बोर्ड ने वन विभाग को ट्रांसप्लांट किए पेड़ों की जगह 4090 पौधे लगाने की जिम्मेदारी दी। चंबल कॉलोनी के परिसर में 400 नए पौधे लगाए हैं। ट्रांसप्लांट करने वाली कंपनी ने 80 फीसदी जीवित होने का दावा किया है। ट्रांसप्लांट कितना सफल है, इसे पता करने के लिए एक कमेटी बनाई। कमेटी ने परिवहन मुख्यालय के आसपास ट्रांसप्लांट किए गए पेड़ों का निरीक्षण किया। उसकी रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की। 10 से 15 साल से ऊपर के पेड़ ट्रांसप्लांट नहीं हुए।

बड़े पेड़ के जीवित रहने की संभावना इसलिए कम

- 10 साल से ऊपर के पेड़ का झाड़ काफी बड़ा होता है। इसकी जड़ें भी गहरी होती हैं। जब इसे उखाड़ा जाता है तब जड़ों को नुकसान अधिक होता है। चंबल कॉलोनी से 100 साल पुराने पेड़ भी ट्रांसप्लांट किए गए। अधिकतर पेड़ों की उम्र 50 साल से अधिक थी।

- बड़े पेड़ के ट्रांसप्लांट पर 45 हजार रुपए तक का खर्च आया है। सवा करोड़ रुपए पेड़ ट्रांसप्लांट में खर्च किए गए हैं।

- अनुपयोगी पेड़ों का ट्रांसप्लांट सफल हुआ है। फलदार पेड़ों का ट्रांसप्लांट सफल नहीं है।

Published on:
19 Aug 2025 11:08 am
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