शिक्षा विभाग की रिटायर्ड क्लर्क उर्मिला सिंह भदौरिया की मौत के बाद उन्हें जिंदा समझ रहे उनके बेटे अखंड और बेटी रितु ने पूरी रात आखों में काट दी। दोनों भाई बहन रात भर घर के बाहर इस इंतजार में बैठे रहे कि मां वापस लौटेगी। आसपास के लोगों का भी दोनों की हालत देखकर […]
शिक्षा विभाग की रिटायर्ड क्लर्क उर्मिला सिंह भदौरिया की मौत के बाद उन्हें जिंदा समझ रहे उनके बेटे अखंड और बेटी रितु ने पूरी रात आखों में काट दी। दोनों भाई बहन रात भर घर के बाहर इस इंतजार में बैठे रहे कि मां वापस लौटेगी। आसपास के लोगों का भी दोनों की हालत देखकर कलेजा दहल गया। लेकिन दोनों की मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने की वजह से पड़ोसी उन्हें यह समझाने की हिम्मत नहीं कर पाए कि मां अब कभी नहीं लौटेगी। सुबह लोगों ने पूरा वाक्या पुलिस को बताया, तब दोनों को स्वर्ग सदन आश्रम भेजने का इंतजाम किया गया। अखंड और रितु को पुलिस सुबह थाने ले आई। दोनों ने पांच दिन से भरपेट खाना तक नहीं खाया था। उन्हें खाना खिलाया फिर समझाया कि उन्हें आश्रम में भेज रहे हैं। वहां दोनों ठीक हो जाएंगे तब मां उनसे आकर मिलेगी। मां मिलेगी इस उम्मीद में दोनों आश्रम जाने को तैयार हो गए।
जालम सिंह का बाडा (दही मंडी) में शुक्रवार को उर्मिला सिंह भदौरिया की क्षत विक्षत लाश उनके घर में मिली थी। उर्मिला सिंह की करीब चार दिन पहले मौत हो चुकी थी। लेकिन उनका बेटा अखंड और बेटी रितु उन्हें जिंदा समझ कर लाश को घर में रखे थे। दोनों आसपास वालों को भी कुछ नहीं बताया था। पुलिस का कहना है अखंड और रितु दोनों मानसिक तौर पर बीमार हैं। अखंड इंजीनियर है लेकिन पढाई पूरी करने के बाद उसकी मानसिक स्थिति खराब हो गई। इसी तरह रितु ने भी साइंस से ग्रुजेएट किया है। वह भी मानसिक रुप से कमजोर है।
महीनों बाद देखा
पड़ोसियों ने पुलिस को बताया अखंड और रितु को महीनो बाद देखा है। उर्मिला सिंह ही आसपास वालों से संबंध रखती थी। दोनों भाई बहन तो घर से बाहर तक नहीं निकलते थे। उधर उर्मिला की मौत के बाद रितु और अखंड की रिश्तेदार भी जिम्मेदारी उठाने की हिम्मत नहीं कर पाए है। इसलिए दोनों की देखभाल और उनके खाने पीने के इंतजाम का संकट हो गया था। कोतवाली थाना प्रभारी मोहिनी वर्मा ने बताया दोनों भाई बहन को सुरक्षित जगह की जरुरत थी। इसलिए स्वर्ग सदन आश्रम के स्टॉफ से बात की थी। रविवार को आश्रम का वाहन आकर दोनों को साथ ले गया।