ग्वालियर के योगा थेरिपिस्ट प्रबल कुशवाह का शव आखिरकार चीन से भारत आया। जिसे देखकर हर किसी की आंखें ना हो गईं। तीन महीने बाद मृतक प्रबल कुशवाह की अंतिम यात्रा में पूरा शहर उमड़ पड़ा....
ग्वालियर के योगा थेरिपिस्ट प्रबल कुशवाह का शव आखिरकार चीन से भारत आ गया। एकलौते बेटे की मौत से गमजदा माता-पिता ने तीन महीने बाद बेटे का अंतिम संस्कार किया। बता दें कि चीन में संदिग्ध परिस्थितियों में प्रबल की मौत हो गई थी। जांच में चीन में प्रबल की मौत को आत्महत्या करार दिया था। वहीं कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक प्रबल का शव तीन महीने बाद चीन ने भारत भेजा।
दरअसल ग्वालियर के माधौगंज थाना क्षेत्र के रॉक्सी पुल इलाके में रहने वाले सुरेन्द्र कुशवाह एक टैक्सी चालक हैं। उनका इकलौता बेटा प्रबल कुशवाह पेशे से योग थेरिपिस्ट था। फरवरी 2023 में उसे चीन के बीजिंग से योग सेंटर में नौकरी का ऑफर मिला था। इस ऑफर को प्रबल कुशवाह ने अपने करियर का टर्निंग प्वाइंट माना और नौकरी के लिए चीन चला गया।
- चीन में पहुंचकर लगातार माता-पिता के संपर्क में रहने वाले प्रबल ने उन्हें बताया था कि वहां सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा है।
- इस बीच कुछ दिन से उसका फोन नहीं आया। वहीं माता-पिता ने फोन लगाया तो फोन बंद आने लगा।
- प्रबल कुशवाह के परिजनों को मामला संदिग्ध लगा। तो उन्होंने प्रबल कुशवाह को चीन बुलाने वाली उसकी फ्रेंड सू-चाइन और मिस रोजी से संपर्क करना चाहा, लेकिन उन्होंने फोन ही रिसीव नहीं किए।
- लंबे इंतजार के बाद जब प्रबल कुशवाह को चीन बुलाने वाली उसकी फ्रेंड सू-चाइन और मिस रोजी से संपर्क हुआ, तो पता चला कि प्रबल ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
प्रबल कुशवाह की मौत से गमजदा माता-पिता ने पीएमओ में गुहार लगाई। कंेद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और मध्य प्रदेश के सीएम डॉक्टर मोहन यादव से प्रबल का शव जल्द से जल्द भारत लाने की गुजारिश की।
प्रबल कुशवाह के परिजनों ने भारतीय दूतावास से प्रबल की मौत पर चीन सरकार से निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की थी।
प्रबल की बॉडी भारत लाने शहर के प्रबुद्ध और परिवार के लोगों ने जस्टिस फॉर प्रबल मूवमेंट चलाया था।
तीन महीने के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार सोमवार को प्रबल का शव ग्वालियर उसके घर पहुंचा। तीन महीने बाद अंतिम संस्कार प्रबल के शव को देखते ही हर किसी की आंखें नम हो गईं। प्रबल की शव यात्रा रॉक्सी पुल स्थित घर से मुक्तिधाम के लिए निकाली गई। जिसमे शहर भर के लोग शामिल हुए। आखिरकार प्रबल के पार्थिव शरीर का तीन महीने बाद ही सही लेकिन दाह संस्कार कर दिया गया।