हनुमानगढ़

किसानों के खेत का बिजली कनेक्शन काटने में जल्दी, राहत के नाम पर तीन से चार फसलों का बीमा क्लेम बकाया

हनुमानगढ़. राजस्थान पत्रिका की ओर से रविवार को जिला मुख्यालय पर टॉक शो का आयोजन किया गया। इसमें वक्ताओं ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की खामियां गिनाई। सबका कहना था कि इस योजना में पारदर्शिता की कमी है। अफसर आंकड़े व तथ्य छिपाते हैं।
4 min read
किसान प्रतिनिधियों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के क्रियान्वयन पर उठाए सवाल
किसान प्रतिनिधियों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के क्रियान्वयन पर उठाए सवाल

-पारदर्शिता की कमी, बीमा कंपनियां व अफसर आंकड़ें छिपाकर कर रहे कमाई, किसानों के हाथ खाली
-किसान प्रतिनिधियों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के क्रियान्वयन पर उठाए सवाल
हनुमानगढ़. राजस्थान पत्रिका की ओर से रविवार को जिला मुख्यालय पर टॉक शो का आयोजन किया गया। इसमें वक्ताओं ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की खामियां गिनाई। सबका कहना था कि इस योजना में पारदर्शिता की कमी है। अफसर आंकड़े व तथ्य छिपाते हैं। स्थिति यह है कि केसीसी वाले किसानों के खातों से प्रीमियम स्वत: ही काट लिया जाता है। इसकी लिखित सूचना या इससे संबंधित दस्तावेज किसानों के घर नहीं पहुंचाया जाता। फसल खराबा होने पर दो से तीन बरसों से किसानों को क्लेम के नाम पर घुमाया जा रहा है। बीमा कंपनियों की मनमानी से किसान लगातार परेशान हो रहे हैं। फार्मर आईडी सरकार बनवा रही है। इसमें सारे रिकॉर्ड दर्ज हैं तो फिर फसल बीमा जारी करने में इतना लंबा वक्त क्यों लगा रही है। किसानों के हालात तो ऐसे हैं कि बीते 31 मार्च को हजारों किसानों का खेत का बिजली कनेक्शन इसलिए काट दिया गया, क्योंकि उनका बिल बकाया था। दूसरी तरफ सरकार फसल बीमा क्लेम दो से तीन बरसों से किसानों को नहीं दे रही है। सरकार बीमा कंपनियों पर लगाम नहीं लगा रही है। आंकड़े छिपाकर सरकार व बीमा कंपनियां किसानों को गुमराह कर रही है। टॉक शो में मौजूद सभी लोगों ने फसल बीमा जारी करने संबंधी व्यवस्थाओं में बदलाव की जरूरत बताई। ताकि फसल खराब होने की स्थिति में त्वरित लाभ किसानों को मिल सके। डिजिटल जमाने में भी दो से तीन बरसों का क्लेम अटकने पर वक्ताओं ने कहा कि यह सरकारी तंत्र के लिए शर्मनाक स्थिति है।

यह रहे मौजूद
राजस्थान पत्रिका की ओर से रविवार को जंक्शन के व्यापार मंडल धर्मशाला में टॉक शो का आयोजन किया गया। इसमें भादरा के पूर्व विधायक बलवान पूनियां, किसान नेता मंगेज चौधरी, रघुवीर वर्मा, रणवीर सिहाग, मनीष मक्कासर, कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष तरुण विजय, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष देवेंद्र पारीक, पूर्व जिला उपाध्यक्ष डॉ. भारतभूषण शर्मा, व्यापार मंडल हनुमानगढ़ जंक्शन के अध्यक्ष कुलवीर सिंह, कृषि विभाग के सेवानिवृत्त उप निदेशक बलवीर खाती, असंगठित किसान-कर्मचारी कांग्रेस के प्रदेश सचिव रायपाल प्रजापति, रामस्वरूप भाटी आदि टॉक शो में मौजूद रहे।

टॉक शो में उक्त विचार आए सामने
-फसल बीमा का प्रीमियम काटने के बाद किसान के पास इससे संबंधित दस्तावेज की कॉपी भेजनी चाहिए। फसल खराब होने के तत्काल बाद किसान के खाते में जब राशि जमा करवाई जाए, इसकी जानकारी मय दस्तावेज किसान के पास जानी चाहिए। जिससे उसे पता चलता रहे कि उसका प्रीमियम कितना कटा था, उसे कितना क्लेम मिला।
-योजना का क्रियान्वयन पूर्ण पारदर्शिता के साथ किया जाना चाहिए। सम्पूर्ण आधारभूत सूचना सार्वजनिक डोमेन पर प्रकाशित हो। सम्बन्धित आंकड़ों को राज्य, जिला तथा ब्लॉक स्तर पर क्रियान्वयन एजेंसी को उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
-फार्मर आइईडी के साथ लिंक खाता बंद होने पर जनाधार खाते के साथ लिंक खाते को वैकल्पिक खाता माना जाना जाए।

  • बिना वजह पूर्वाग्रह से ग्रसित हुए बार-बार आपत्ति दर्ज करवाकर योजना के क्रियान्वयन में बाधा उत्पन्न करने वाले गैर जिम्मेदार व्यक्ति को दंडित किया जाना चाहिए। उसे योजना के परिचालन कार्यक्रम से वंचित करने का नियम लागू हो।-प्राकृतिक आपदाओं के कारण फसल के नुकसान के मामले में मध्य-मौसम प्रतिकूलता सर्वेक्षण के लिए भू-क्षेत्र रिपोर्ट के पूर्व प्रावधान को सरकार की ओर से अपनी अधिसूचना से हटा दिया गया है। जो कृषकों के हित के विरूद्ध है।-फसल बीमा कम्पनी की ओर से एक तरफा कार्यवाही करके पॉलिसी को निरस्त कर दिया जा रहा है। इसके स्थान पर डीएलएससी द्वारा पॉलिसी पर आपत्ति के लिए सुनवाई का अवसर प्रदान किया जाए।
  • गिरदावरी रिपोर्ट अनुसूची की पुन: जांच की जानी चाहिए। क्योंकि पिछले चार दशकों से कम अवधि वाली फसलें और उनकी किस्में किसानों द्वारा विशेष रूप से वर्षा आधारित क्षेत्रों में अपनाई जा रही हैं। जब मध्य मौसम प्रतिकूलता सर्वेक्षण का प्रावधान सरकार द्वारा हटा दिया गया है तो सितंबर से गिरदावरी रिपोर्ट क्यों संसाधित की जाती है। इस पर विचार करने की जरूरत है।
  • चूंकि राज्य सरकार के पास कृषक कल्याण कोष में पर्याप्त धनराशि है, इसलिए इस योजना को पश्चिम बंगाल सरकार की तर्ज पर बीमा कंपनियों के बजाय राज्य सरकार द्वारा क्रियान्वित किया जा सकता है। इसमें किसानों को जरूरत पडऩे पर आवश्यक मदद प्रदान की जा सकती है। चूंकि कृषक कल्याण कोष किसानों द्वारा किसानों के लिए बनाया गया है, इसलिए इसका उपयोग केवल किसान कल्याण के लिए किया जा सकता है।-किसानों के दावे को क्यों रोका गया। इसकी पूर्ण सूचना संबंधित किसान एवं जिला तथा ब्लॉक स्तर पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था होनी चाहिए।

हित नहीं सोच रही कंपनियां
फसल बीमा कंपनियां केवल अपने मुनाफे की सोचकर काम कर रही है। सेटेलाइट से फसल कटाई प्रयोग रोकना चाहिए। फसल बीमा के सभी आंकड़े किसान हित में जारी करने की जरूरत है। परंतु सरकार बीमा कंपनियों को ऐसा करने के लिए बाध्य नहीं कर रही है। इससे किसान परेशान हो रहे हैं। हम अपने संघर्ष के बूते किसानों को राहत दिलाने के प्रयास में निरंतर जुटे हुए हैं।
-बलवान पूनियां, पूर्व विधायक, भादरा

किसानों का बढ़ा रहे दर्द
विपरीत मौसम में किसानों के दर्द पर मरहम लगाने की सोच के साथ शुरू की गई उक्त योजना का समुचित लाभ किसानों को नहीं मिल रहा है। डिजिटल जमाने में किसानों के खेत में फसल खराब होने की स्थिति में तत्काल इसका मूल्यांकन करके सरकार को चाहिए कि किसानों के खाते में बीमा क्लेम की राशि जमा करवाए। तभी किसानों को राहत मिल सकेगी।
-तरुण विजय, जिला उपाध्यक्ष, जिला कांग्रेस कमेटी हनुमानगढ़

अधिकारियों की सोच ठीक नहीं
जिले मेें खरीफ 2023 का काफी क्लेम बकाया चल रहा है। रबी सीजन का भी पूरा क्लेम किसानों को नहीं मिला है। खरीफ 2024 के क्लेम का तो अब तक बीमा कंपनी ने सेटलमेंट भी नहीं किया है। प्रीमियम पेटे किसानों से मोटी राशि वसूलने के बावजूद भी क्लेम के नाम पर किसानों को कुछ नहीं दिया जा रहा है। जिला प्रशासन के अधिकारियों की सोच भी ज्यादा किसान हितैषी नहीं कह सकते । इस वजह से बीमा कंपनियां किसान हितों से खिलवाड़ कर रही हैं।

राज्य सरकार करे संचालन
जिले के अरडक़ी क्षेत्र में कई किसानों का चने की फसल का फसल बीमा वर्ष 2018-19 से बकाया चल रहा है। चार करोड़ से अधिक का क्लेम पेडिंग है। सेटेलाइट से फसल कटाई प्रयोग करने से किसानों को नुकसान है। बीमा कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिहाज से सारे काम किए जा रहे हैं। खरीफ 2024 की फसलों का अब तक बीमा कपंनियों ने सेटलमेंट भी नहीं किया है। इससे बड़ी विडम्बना क्या हो सकती है। किसान हित में शुरू की गई उक्त योजना को राज्य सरकार अपने हाथ में लेकर पश्चिम बंगाल की तर्ज पर संचालित करे। इससे किसानों को लाभ मिलेगा।
-बलवीर खाती, सेवानिवृत्त उप निदेशक, कृषि विभाग हनुमानगढ़

Published on:
13 Apr 2025 08:10 pm