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Success Story : किसान पिता का सपना हुआ साकार, 2 बेटे और बेटी बने डॉक्टर; प्रेरणा से गांव के 8 बच्चों ने क्रैक किया NEET

Father's Day Special : फादर्स डे पर गोदारा परिवार गांव के लिए मिसाल बना। किसान पिता लूणाराम चौधरी का सपना साकार हुआ। उनके 2 बेटे और एक बेटी डॉक्टर बने। इनसे प्रेरणा लेकर गांव के 8 बच्चों ने NEET क्रैक किया।
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हनुमानगढ़

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Sanjay Kumar Srivastava

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Updated: 21 Jun 2026, 1:12 PM IST

Hanumangarh Lunaram Chaudhary 2 son daughter doctors 8 gaon children Inspired cracked NEET

Father's Day Special : टोपरियां में पुत्रों व पुत्री के साथ लूणाराम चौधरी। फोटो पत्रिका

Father's Day Special in Hanumangarh : फादर्स डे पर गोदारा परिवार गांव के लिए मिसाल बना। हनुमानगढ़ सिटी के टोपरिया में फादर्स डे के अवसर पर गांव किकरालिया का गोदारा परिवार शिक्षा, संघर्ष और पारिवारिक मूल्यों की प्रेरणादायक मिसाल बनकर सामने आया है। एक मध्यमवर्गीय किसान परिवार से जुड़े स्वर्गीय चौधरी उदाराम गोदारा के परिवार के दो पोते डॉ. कमलेश गोदारा, डॉ. समीर गोदारा तथा पोती साक्षी चौधरी ने डॉक्टर बनकर परिवार और गांव का नाम रोशन किया है। इस सफलता के पीछे पिता लूणाराम चौधरी और बड़े बाबा बलराम गोदारा के त्याग, संघर्ष और दूरदर्शिता की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

परिवार के मुखिया स्वर्गीय उदाराम गोदारा ने लगभग तीन दशक पहले ही शिक्षा के महत्व को समझ लिया था। सीमित संसाधनों और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने पुत्र लूणाराम चौधरी को झुंझुनूं के बगड़ स्थित पिरामल स्कूल में शिक्षा के लिए भेजा तथा बाद में उच्च शिक्षा के लिए बीकानेर भेजा। कम पढ़े-लिखे होने के बावजूद वे शिक्षा और रोजगार के महत्व को भली-भांति समझते थे।

बीकानेर से पढ़ाई पूरी करने के बाद लूणाराम चौधरी रोजगार की तलाश में जयपुर पहुंचे। खेती ही परिवार की आय का प्रमुख साधन थी, ऐसे में नौकरी करना समय की आवश्यकता थी। परिवार की जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने अपने बच्चों की शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। महंगी किताबों, कोचिंग फीस और अन्य शैक्षणिक खर्चों के बावजूद उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी।

बच्चों को टेलीविजन व मोबाइल की आभासी दुनिया से रखा दूर

लूणाराम चौधरी की इच्छा थी कि उनके सभी बच्चे चिकित्सा क्षेत्र में जाएं। इसके लिए उन्होंने घर में अध्ययन का सकारात्मक वातावरण तैयार किया और बच्चों को टेलीविजन व मोबाइल की आभासी दुनिया से दूर रखा। परिवार में टीवी और मोबाइल तब आए, जब बच्चों का चयन हो चुका था। बड़ी बेटी ज्योति गोदारा ने वनस्थली विद्यापीठ से स्नातक किया है और वर्तमान में बैंकिंग प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही हैं। बच्चों के चयन के बाद पूरे गांव ने गोदारा परिवार का स्वागत सत्कार किया।

गांव के आठ विद्यार्थियों ने नीट किया क्रेक

इस उपलब्धि से गांव के अन्य बच्चों को भी प्रेरणा मिली। वर्ष 2019 के बाद से गांव के लगभग सात से आठ विद्यार्थी नीट जैसी कठिन परीक्षा में सफलता प्राप्त कर चिकित्सा शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। गोदारा परिवार इस सम्मान और सहयोग के लिए ग्रामवासियों का सदैव आभारी रहेगा। सफल संतानों में ज्योति गोदारा, डॉ. कमलेश गोदारा, डॉ. समीर गोदारा और साक्षी चौधरी शामिल हैं।

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