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Rajasthan: जांच जयपुर में, दवा हनुमानगढ़ में, HIV मरीजों पर दोहरी मार,खामियाजा भुगत रहे संक्रमित

HIV Treatment Center: हनुमानगढ़ जिला अस्पताल में एंटी रेट्रो वायरल थेरेपी (ART) सेंटर शुरू होने से एचआईवी संक्रमित मरीजों को स्थानीय स्तर पर उपचार मिलने की उम्मीद जगी थी, लेकिन यह उम्मीद अब तक पूरी तरह साकार नहीं हो सकी है। सेंटर खुलने के बावजूद यहां एचआईवी मरीजों की सबसे महत्वपूर्ण सीडी-4 जांच की सुविधा उपलब्ध नहीं है।

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हनुमानगढ़ जिला अस्पताल स्थित एआरटी सेंटर, पत्रिका फोटो

HIV Treatment Center: हनुमानगढ़ जिला अस्पताल में एंटी रेट्रो वायरल थेरेपी (ART) सेंटर शुरू होने से एचआईवी संक्रमित मरीजों को स्थानीय स्तर पर उपचार मिलने की उम्मीद जगी थी, लेकिन यह उम्मीद अब तक पूरी तरह साकार नहीं हो सकी है। सेंटर खुलने के बावजूद यहां एचआईवी मरीजों की सबसे महत्वपूर्ण सीडी-4 जांच की सुविधा उपलब्ध नहीं है। नतीजन संक्रमितों को जांच के लिए आज भी जयपुर के एसएमएस अस्पताल जाना पड़ता है, जबकि दवा लेने के लिए उन्हें हनुमानगढ़ आना होता है। इससे मरीजों को अतिरिक्त आर्थिक खर्च, समय की बर्बादी और मानसिक परेशानी झेलनी पड़ रही है।

हनुमानगढ़ जिला अस्पताल में एआरटी सेंटर शुरू हुए 5 वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (नाको) की ओर से अब तक सीडी 4 जांच मशीन और आवश्यक उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मशीन की मांग कई बार भेजी जा चुकी है, लेकिन स्वीकृति के बाद भी संसाधन उपलब्ध नहीं हो सके हैं।

तो सेंटर का उद्देश्य पूरा

जानकारों के अनुसार एआरटी सेंटर का मुख्य उद्देश्य यहीं होता है कि एचआईवी संक्रमित मरीजों को जांच और उपचार दोनों सुविधाएं एक ही स्थान पर मिलें। हनुमानगढ़ में फिलहाल व्यवस्था ऐसी है कि मरीज को बीमारी की गंभीरता जानने के लिए जयपुर जाना पड़ता है और उपचार की दवा अलग से स्थानीय स्तर पर लेनी पड़ती है। इससे एआरटी सेंटर का लाभ अधूरा रह गया है।

क्या है सीडी-4 जांच

सीडी 4 शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता से जुड़ी महत्वपूर्ण टी-कोशिकाएं होती हैं। एचआईवी संक्रमण इन कोशिकाओं पर सीधा असर डालता है। सीडी-4 की संख्या के आधार पर चिकित्सक बीमारी की गंभीरता और उपचार की आवश्यकता तय करते हैं। स्वस्थ व्यक्ति में इन कोशिकाओं की संख्या सामान्यतः 1200 से 1500 के बीच होती है। संख्या काफी कम होने पर संक्रमण गंभीर अवस्था में माना जाता है और उपचार की रणनीति तय की जाती है।

संचालन में भी विलम्ब

जिला अस्पताल में एआरटी सेंटर वर्ष 2014 में स्वीकृत हुआ था, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण इसका संचालन वर्ष 2020 में शुरू हो सका। इस दौरान केवल लिंक एआरटी सेंटर की व्यवस्था संचालित होती रही। अधिकारियों का मानना है कि संचालन में हुई देरी का असर बाद में उपकरण उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पर भी पड़ा। इसका खमियाजा अब तक रोगियों को भुगतना पड़ रहा है।

जिम्मेदार ये बोले…

जिला अस्पताल स्थित एआरटी सेंटर में सीडी-4 जांच के लिए आवश्यक मशीन और उपकरण अभी उपलब्ध नहीं हैं। इस संबंध में नाको को कई बार पत्र लिखकर अवगत कराया जा चुका है।
डॉ. शंकरलाल सोनी, पीएमओ, राजकीय एमजीएम जिला अस्पताल हनुमानगढ़।

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