हनुमानगढ़. जिले में इस वक्त करीब 96000 पंजीकृत श्रमिकों के मजदूर कार्ड बने हैं। श्रम विभाग कार्यालय में पंजीकृत श्रमिकों के अलावा बहुत से ऐसे श्रमिक भी हैं, जिनके अब तक मजदूर कार्ड नहीं बने हैं।
-जिले में निर्माण व अन्य कार्य में लगे श्रमिकों के नहीं बने हैं मजदूर कार्ड
-योजनाओं के लाभ से हो रहे वंचित, झेल रहे आर्थिक संकट
हनुमानगढ़. जिले में इस वक्त करीब 96000 पंजीकृत श्रमिकों के मजदूर कार्ड बने हैं। श्रम विभाग कार्यालय में पंजीकृत श्रमिकों के अलावा बहुत से ऐसे श्रमिक भी हैं, जिनके अब तक मजदूर कार्ड नहीं बने हैं। योजनाओं के उचित प्रचार-प्रसार के अभाव में ऐसे श्रमिकों को सरकार की किसी योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। जानकारी के अनुसार चिनाई, पानी फिटिंग, मार्बल घिसाई आदि कार्य में हजारों श्रमिक लगे हुए हैं। परंतु सरकारी योजनाओं का इन्हें ज्ञान नहीं होने की वजह से वह श्रम विभाग में जाकर मजदूर कार्ड नहीं बना पा रहे। इस वजह से उन्हें सरकार की किसी योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसलिए वह आर्थिक संकट से भी जूझ रहे हैं।
श्रम कल्याण विभाग में कार्यरत कार्मिकों के अनुसार राज्य सरकार श्रमिकों के कल्याण के लिए कई तरह की योजनाएं चला रही है। इसमें पंजीकृत श्रमिकों के परिवार में दो संतान की पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति, टूल किट योजना में आर्थिक सहायता, दुर्घटना योजना में बीस हजार से तीन लाख रुपए तक आर्थिक सहायता दी जा रही है। इसी तरह सामान्य मौत पर दो लाख तथा दुर्घटना में मौत पर पांच लाख रुपए की सहायता सरकार स्तर पर देने की योजना है।
इसके अलावा वर्ष 202-21 तक सरकार श्रमिकों की बेटियों की शादी के लिए 55000 रुपए की सहायता दे रही थी। परंतु इसके बाद सरकार स्तर पर आवेदन लेने बंद कर दिए। इससे श्रमिकों में मायूसी है। श्रम कल्याण अधिकारी देवेंद्र मोदी के अनुसार पंजीकृत श्रमिकों के परिवार के छात्र-छात्राओं को योजना के अनुसार छात्रवृत्ति का भुगतान किया जा रहा है। टूल किट योजना में भी सहायता प्रदान कर रहे हैं। इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए जरूरी है कि श्रमिक अपना मजदूर कार्ड बनवाएं।
मनरेगा श्रमिक मजदूरी को तरसे
शहरी मनरेगा की स्थिति यह है कि जब से योजना शुरू हुई है, तब से आज तक कभी भी इनको समय पर मजदूरी समय पर नहीं मिली है। दो से तीन महीने बाद मजदूरी मिलने से श्रमिक परेशान हो रहे हैं। तपती धूपहरी में जीतोड़ मेहनत के बाद भी महीनों तक इनके हाथ खाली रहते हैं। श्रमिकों की मांग है कि पखवाड़े भर बाद ही सरकार को भुगतान कर देना चाहिए। दो से तीन महीने बाद भुगतान मिलने से परिवार चलाने में परेशानी आ रही है। पिछले महीने तक ग्रामीण क्षेत्रों में भी मनरेगा श्रमिकों का भुगतान काफी देरी से मिलता रहा है।
भुगतान का प्रयास
हनुमानगढ़ शहरी मनरेगा में जनवरी तक का भुगतान श्रमिकों को कर दिया गया है। इसके बाद भुगतान नहीं हुआ है। मुख्यालय को अवगत करवाकर जल्द भुगतान करवाने का प्रयास है।
-रघुवीर मीणा, जेटीए, मनरेगा, नगरपरिषद हनुमानगढ़