हनुमानगढ़. जिले में रबी फसलों की बिजाई के लिए किसानों को मांग के अनुसार खाद नहीं मिल रही है। इसी बीच जिला मुख्यालय पर शुक्रवार को पत्रिका टीम ने क्रय-विक्रय सहकारी समिति स्तर पर वितरित की जा रही खाद वितरण प्रक्रिया की हकीकत जानी तो मौके पर ज्यादा किल्लत नजर नहीं आई।
-सर्द मौसम में खाद के लिए बहाना पड़ रहा पसीना, घंटों लाइन में लगने के बाद भी किसान लौट रहे खाली हाथ
-जिले में रबी की प्रमुख फसल गेहूं की बिजाई के लिए किसान मांग रहे यूरिया-डीएपी
हनुमानगढ़. जिले में रबी फसलों की बिजाई के लिए किसानों को मांग के अनुसार खाद नहीं मिल रही है। इसी बीच जिला मुख्यालय पर शुक्रवार को पत्रिका टीम ने क्रय-विक्रय सहकारी समिति स्तर पर वितरित की जा रही खाद वितरण प्रक्रिया की हकीकत जानी तो मौके पर ज्यादा किल्लत नजर नहीं आई। कुछ मजदूर समिति के सामने ट्रेक्टर से खाद उतारते नजर आए। कुछ देर बाद किसानों में इसका वितरण भी शुरू करवा दिया गया। यहां किसानों की किसी तरह की कतार नजर नहीं आई। मौजूद किसानों का कहना था कि जितनी हमारी मांग है, उतनी खाद समिति स्तर पर मिल रही है। लेकिन जिला मुख्यालय के अलावा अन्य तहसीलों में किसानों को मांग के अनुसार डीएपी नहीं मिलने से वह परेशान हो रहे हैं। भादरा, रावतसर, संगरिया सहित अन्य तहसीलों में खाद के लिए मारामारी देखी जा रही है। आंकड़ों की बात करें तो कृषि विभाग के पास डीएपी व यूरिया का पर्याप्त स्टॉक बताया जा रहा है। लेकिन हकीकत में किसानों को एक आधार कार्ड पर दो से पांच थैले खाद ही दिए जा रहे हैं। कहीं-कहीं तो किसानों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि सर्द मौसम में किसानों को खाद के लिए पसीना बहाना पड़ रहा है। किसानों का सवाल है कि जब खाद का पर्याप्त स्टॉक विभाग के पास है तो फिर एक आधार कार्ड पर दो-तीन थैले की बाध्यता क्यों की गई है। विभाग इस व्यवस्था से क्या साबित करना चाहता है। जानकारी के अनुसार हनुमानगढ़ जिले में वर्ष 2025-26 में कुल 52000 एमटी डीएपी की मांग की गई थी। इसमें 14 नवम्बर तक 46500 एमटी उपलब्ध हो गई है। केवल नवम्बर महीने की बात करें तो 11000 एमटी की मांग थी, इसमें अब तक 6468 एमटी डीएपी हनुमानगढ़ जिले को आवंटित की गई है। वर्तमान में करीब 2400 एमटी डीएपी उपलब्ध होने का दावा कृषि विभाग के अधिकारी कर रहे हैं। इसी तरह यूरिया की डिमांड 96000 एमटी थी। वर्तमान में 13000 एमटी यूरिया का स्टॉक पड़ा है। स्टॉक के बावजूद किसानों को गिन-गिन कर थैले क्यों दिए जा रहे हैं, इसका जवाब देने में अधिकारी कतरा रहे हैं। इस बीच कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा का बयान भी मीडिया में आया है। जिसमें मंत्री कुछ लोगों की ओर से खाद की कृत्रिम कमी पैदा करने की बातें कहते हुए नजर आ रहे हैं। मंत्री ने रबी सीजन में किसानों को मांग के अनुसार खाद उपलब्ध करवाने का दावा किया है।
यहां सुबह से लग जाती लाइन, लौट रहे खाली हाथ
रावतसर. डीएपी यूरिया की किल्लत के कारण किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है लोग सुबह से ही यूरिया डीएपी के लिए लाइन में लगकर घंटों इंतजार के बाद दो बैग प्राप्त होते हैं। वहीं कई लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ता है। क्रय विक्रय सहकारी समिति के अध्यक्ष भगाराम बेनीवाल ने बताया कि डीएपी के लिए डिमांड तो कई गुना की जाती है परंतु वह काफी कम मात्रा में भेजी जाती है। जिससे लोग डीएपी के लिए भटकते रहते हैं। इफको द्वारा दुकानदारों को डीलर बना दिया गया है परंतु किसान दुकानदारों के पास मिलने वाली डीएपी पर भरोसा नहीं करते हैं। भारतीय किसान संघ के तहसील अध्यक्ष जयवीर गोदारा ने बताया कि अगर राज्य सरकार किसानों को राहत देना चाहती है तो जो पूर्ति बिजाई के समय या उसके बाद में की जाती है वह पहले ही कर दे तो किसानों को बिजाई के समय बाजार में डीएपी यूरिया के लिए घंटों लाइन में लगकर अपना समय बर्बाद नहीं करना पड़ेगा। वर्तमान में स्थित यह है कि लोगों ने सरसों की बिजाई तो कर दी है परंतु गेहूं की बिजाई अभी शेष है। जिसके लिए लोग डीएपी के लिए चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन उन्हें डीएपी नहीं मिल रही है।
जरूरत के हिसाब से मिली
मेरे पास चार बीघा जमीन है। जिसमें खेती करने के लिए मुझे दो-दो थैले डीएपी व यूरिया की जरूरत है। जंक्शन में क्रय विक्रय सहकारी समिति पर आज खाद लेना आया हूं। मुझे जितनी खाद चाहिए थी, उतनी मिल गई है।
-सुखपाल सिंह, किसान, गांव हिरणावाली, हनुमानगढ़।
नहीं है खाद की कमी
सभी किसानों को जरूरत के हिसाब से खाद उपलब्ध हो, इसके लिए विभाग स्तर पर आधार कार्ड के हिसाब से खाद वितरित करवा रहे हैं। वर्तमान में डीएपी व यूरिया का पर्याप्त स्टॉक है। जिन किसानों को खाद नहीं मिल रही है, वह तत्काल कृषि विभाग को शिकायत कर सकते हैं। अभी लगातार खाद के रैक पहुंच रहे हैं। पांच-सात दिन बाद डिमांड से अधिक का स्टॉक हो जाएगा।
-प्रमोद यादव, संयुक्त निदेशक, कृषि विभाग हनुमानगढ़।