हनुमानगढ़. जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता की अध्यक्षता में शनिवार को हुई बैठक में इंदिरागांधी नहर के चार जनवरी के बाद के रेग्यूलेशन की तस्वीर साफ हो गई।
हनुमानगढ़. जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता की अध्यक्षता में शनिवार को हुई बैठक में इंदिरागांधी नहर के चार जनवरी के बाद के रेग्यूलेशन की तस्वीर साफ हो गई। चार से 21 जनवरी तक आईजीएनपी को चार में दो समूह में चलाकर बाकी की दो बारियां तीन में एक समूह में चलाने के प्रस्ताव पर सहमति बनने के बाद मुख्य अभियंता प्रदीप रुस्तगी ने बैठक समाप्त करने की घोषणा की। इससे पहले जंक्शन के जल संसाधन विभाग कार्यालय में काफी देर तक चली बैठक में मुख्य अभियंता चार में दो समूह के रेग्यूलेशन को मंजूर करने में असमर्थता जताते रहे।
किसान प्रतिनिधि अमित कोचर व गुरविंदर सिंह सहित मौजूद सभी विधायक जनवरी में इंदिरागांधी नहर को चार में दो समूह में पानी चलाने की मांग करते रहे। ऐसा नहीं करने पर सरसों व गेहूं दोनों फसलों के बर्बाद होने की बात कही। किसान नेताओं ने कहा कि विभाग के पास पर्याप्त पानी होने के बावजूद किसानों को मांग के अनुसार पानी नहीं दिया जा रहा है। किसानों की मांग के अनुसार नहरों में पानी नहीं चलाने पर आंदोलन की चेतावनी दी। रायसिंहनगर विधायक सोहन नायक ने रावला-घड़साना आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि उस वक्त भी किसानों ने केवल एक बारी पानी मांगा था। लेकिन विभाग ने पानी नहीं दिया।
आंदोलन में आठ किसान मरे, हजारों परेशान हुए। इसके बाद जितना पानी मांगा, सरकार ने नहरों में पानी चलाया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में टकराव की स्थिति दोबारा नहीं बने, इसलिए अधिकारी किसान हित में चार में दो समूह के रेग्यूलेशन को लागू करें। काफी देर तक चले विचार-विमर्श के बाद इंदिरागांधी नहर को जनवरी में चार में दो समूह में चलाने तथा बाकी की दो बारियां तीन में एक समूह में चलाने पर सहमति बनी। बैठक में चीफ इंजीनियर प्रदीप रुस्तगी ने साफ तौर पर कहा कि 13 मार्च का उक्त रेग्यूलेशन प्रभावी रहेगा। किसान नेताओं ने कहा कि मार्च में उपलब्धता के हिसाब से आप पानी चला देना, हमें यह मंजूर रहेगा। किसान नेताओं ने कहा कि राजस्थान के हित की बात जब आती है बीबीएमबी बदमाशी करने लगता है। अधिकारियों का फर्ज बनता है कि वह राजस्थान सरकार को इससे अवगत करवाएं। पाकिस्तान जा रहे पानी को रोकने के लिए ठोस योजना बनाने की मांग भी ने सभी ने एकजुट होकर की। किसान नेताओं ने कहा कि पाकिस्तान पानी भेजने में हम ढिलाई नहीं करते, लेकिन हमारे किसान को पानी देने में हम पूरा सोच विचार करते हैं।
आग लगा कर छिप जाते हैं सिंचाई अधिकारी
बैठक में विधायकों ने मौजूद एसडीएम मांगीलाल सुथार की तरफ इशारा करते हुए कहा कि साहब देख लो। क्षेत्र में ज्यादातर आंदोलन सिंचाई महकमे के अफसरों के कारण शुरू होता है। आंदोलन शुरू होते हुए सिंचाई अधिकारी छिप जाते हैं। पुलिस, प्रशासन और पब्लिक आमने-सामने हो जाते हैं। दोनों जिलों में दोबारा इस तरह की स्थिति नहीं बने, इसे देखते हुए किसान हित में रेग्यूलेशन बनाने की मांग की। ताकि किसानों की फसलों को बचाया जा सके।
पानी का मुद्दा छोड़, भाजपा-कांग्रेस में उलझे
जल परामर्शदात्री समिति की बैठक में कुछ विधायक सरकार पर दबाव बनाकर किसी तरह से किसानों की मांग के अनुसार नहरों में पानी चलाने की मांग कर रहे थे। इस दौरान भारतीय किसान संघ के कोषाध्यक्ष रामेश्वर सुथार अचानक उठे और वर्ष 2019 का जिक्र करते हुए कहा कि काफी मांग के बावजूद सरकार ने पानी नहीं दिया था। इतना कहते ही रायसिंहनगर विधायक सोहन नायक बिफर पड़ेे। सोहन नायक ने कोषाध्यक्ष रामेश्वर सुथार की तरफ इशारा करते हुए कहा कि आप किसान प्रतिनिधि बनकर आए हैं या फिर सरकार का पक्ष रखने के लिए बैठक में आए हैं। कोषाध्यक्ष सुथार को को किसान विरोधी बताने पर काफी देर तक माहौल गर्माया रहा। विधायक सोहन नायक ने कहा कि माना बांधों में कम पानी है। लेकिन किसानों की फसल को बचाना सरकार का फर्ज बनता है। इसलिए हम सभी को एकजुट होकर किसान को बचाने की बात करनी चाहिए। इसके बाद मामला शांत हुआ।
भाजपा विधायक नदारद
हनुमानगढ़ में जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता कार्यालय में जल परामर्शदात्री समिति की हुई बैठक में अनूपगढ़ विधायक शिमला देवी, सूरतगढ़ विधायक डूंगरराम गेदर, रायसिंहनगर विधायक सोहन नायक, पीलीबंगा विधायक विनोद गोठवाल तथा संगरिया विधायक अभिमन्यु पूनिया आदि मौजूद रहे। इस दौरान भाजपा के किसी विधायक के बैठक में नहीं पहुंचने पर कुछ किसान प्रतिनिधियों ने विरोध जाहिर किया। कांग्रेस जिलाध्यक्ष मनीष मक्कासर ने कहा कि भाजपा विधायक नहरी पानी मुद्दे से सरोकार नहीं रख रहे। यइ ठीक बात नहीं है। एसडीएम मांगीलाल सुथार, जल संसाधन विभाग हनुमागनढ़ के अधीक्षण अभियंता शिवचरण रैगर, रामाकिशन, केएल बैरवा, एक्सईएन केशवानंद बिश्नोई, सुनील काजला आदि बैठक में मौजूद रहे।
इत्ता गीत तो भीत के आगे गातां तो….
बैठक में किसान प्रतिनिधियों ने मुख्य अभियंता प्रदीप रुस्तगी के आगे उनकी कार्यशैली की खूब सराहना की। एक किसान नेता ने कहा कि रुस्तगी जी, इत्ता गीत तो भीत के आगे गातां तो, बे भी मान जाती। इस दौरान संगरिया विधायक अभिमन्यु पूनियां ने चीफ इंजीनियर से कहा कि आप लोग किसी तरह से मैनेज करो। लेकिन किसानों को पूरा पानी दो। किसान नेता अमित कोचर ने कहा कि चीफ साहब आप मैनेज करने में माहिर हो। इसलिए तरह से पानी का मैनेजमेंट करो। नहीं तो किसान बर्बाद हो जाएंगे।
1360 फीट पानी फिर हम क्या दें जवाब
किसान नेताओं ने बैठक में कहा कि वर्तमान में पौंग बांध का लेवल 1360 फीट है। इतना पानी होने के बावजूद यदि नहरों में पूरा पानी नहीं चलेगा तो हम किसानों को क्या जवाब देंगे। इस तरह के सवाल जब किसान नेताओं ने बैठक में रखे तो अधिकारियों ने वॉटर अकाउंट को दोबारा जांचना शुरू किया। आखिरकार कुछ देर बाद किसानों क मांग पर अफसरों ने सहमति प्रदान कर दी।
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