
Hanumangarh Nikay Elections : हनुमानगढ़ के गांधीनगर क्षेत्र में रेलवे लाइन पार करने की समस्या से राहत देने के उद्देश्य से शुरू किया गया फुटओवरब्रिज अब निकाय चुनाव से पहले बड़ा सियासी मुद्दा बनता नजर आ रहा है। करीब 90 प्रतिशत निर्माण होने के बाद भी प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो पाया है। आबादी क्षेत्र की ओर फुटओवरब्रिज के उतराव को लेकर विवाद के चलते लंबे समय से काम बंद है। ऐसे में चुनाव से पहले लोगों को सुविधा मिलने की उम्मीद के बजाय अधूरा निर्माण जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के लिए सवाल बन गया है।
हनुमानगढ़ के गांधीनगर फुटओवरब्रिज का निर्माण पूरा होने पर रेलवे लाइन के दूसरी ओर बसे करीब 10 हजार लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिलने की उम्मीद है। वर्तमान में निर्माण अधूरा होने के कारण लोगों को रेलवे लाइन पार करने के लिए अब भी जोखिम उठाना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से चली मांग पर काम शुरू तो हुआ, लेकिन अंतिम चरण में विवाद के कारण योजना अटक गई।
फुटओवरब्रिज के आबादी क्षेत्र की ओर उतरने के स्थान को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद बना हुआ है। जिला प्रशासन करीब दो माह पहले दोनों पक्षों को बुलाकर उनका पक्ष सुन चुका है। हाल में दोनों पक्षों ने फिर प्रशासन के समक्ष अपनी बात रखी है। अब प्रशासन के निर्णय के बाद ही निर्माण कार्य आगे बढ़ने की संभावना है। नगर परिषद ने परियोजना के लिए रेलवे को करीब पौने चार करोड़ रुपए जमा करवाए थे।
करीब साढ़े चार करोड़ रुपए की लागत वाले इस प्रोजेक्ट के लिए वर्ष 2017 में डीपीआर तैयार कराने के लिए रेलवे को 10 लाख रुपए दिए गए थे, जबकि वर्ष 2020 में राशि जमा होने के बाद निर्माण शुरू हुआ। ड्राइंग में बदलाव के बाद अतिरिक्त राशि का मामला भी सामने आया था। बाद में रेलवे की ओर से अतिरिक्त खर्च वहन करने पर सहमति बनी, लेकिन उतरने के स्थान का विवाद निर्माण में बाधा बन गया।
नगर परिषद की ओर से रेलवे को करीब पौने चार करोड़ रुपए जमा करवाने के बाद फुटओवरब्रिज का निर्माण शुरू हुआ था। परियोजना की कुल लागत करीब साढ़े चार करोड़ रुपए है। करीब 90 प्रतिशत काम पूरा होने के बावजूद उतराव के स्थान को लेकर विवाद के कारण प्रोजेक्ट अधूरा पड़ा है। अब प्रशासन के फैसले पर निर्माण की अगली दिशा निर्भर है।
निकाय चुनाव को देखते हुए क्षेत्र में फुटओवरब्रिज का अधूरा निर्माण राजनीतिक चर्चा का विषय बन रहा है। जिस प्रोजेक्ट को क्षेत्रवासियों की सुविधा से जोड़कर आगे बढ़ाया गया था, वह अब तक पूरा नहीं हो सका। चुनाव से पहले यदि निर्माण कार्य दोबारा शुरू नहीं हुआ तो स्थानीय मतदाताओं के बीच यह सवाल उठना तय माना जा रहा है कि करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद सुविधा आखिर कब मिलेगी। विपक्षी दल और चुनाव मैदान में उतरने वाले स्थानीय प्रत्याशी भी इसे विकास कार्यों से जोड़कर मुद्दा बना सकते हैं।