7 अगस्त 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

राजस्थान के जिस गांव में 20 साल तक गुटखा-जर्दा बैन रहा, वहां अब खुलेआम बिक रहा ‘चिट्टा’, जानें क्यों बिगड़े हालात?

हनुमानगढ़ का मक्कासर गांव, जिसने साल 1993 में गुटखा-तंबाकू पर पाबंदी लगाकर मिसाल कायम की थी। आज 'चिट्टे' और हीरोइन जैसे घातक नशे की चपेट में है। विरोध करने वाले ग्रामीणों और पूर्व सरपंच तक पर हमले हो रहे हैं। पुलिस अब नशे के ठिकानों पर दबिश दे रही है।
2 min read
Google source verification

हनुमानगढ़

image

Arvind Rao

image

अदरीस खान

Aug 07, 2026

Hanumangarh Makkasar village

हनुमानगढ़ में स्थित मक्कासर गांव (पत्रिका फोटो)

-अदरीस खान

Hanumangarh News: हनुमानगढ़ जिले का मक्कासर गांव आज एक गंभीर सामाजिक संकट के दौर से गुजर रहा है। सूरतगढ़ फोरलेन पर स्थित यह वही ऐतिहासिक गांव है, जो कभी अपनी अटूट सामाजिक एकजुटता, अनुशासन और नैतिक मूल्यों के लिए पूरे क्षेत्र में मिसाल माना जाता था। हालांकि, समय के साथ बदले हालातों ने इस आदर्श गांव की पहचान को धुंधला कर दिया है। वर्तमान में मक्कासर गांव 'चिट्टा' और मेडिकेटेड नशे की चपेट में आ चुका है, जिससे ग्रामीणों की दिनचर्या और गांव का शांत वातावरण बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

एक दौर ऐसा भी था, जब गांव में अनुशासन की जड़े बहुत गहरी थीं। साल 1993 में गांव की आर्यन्स समिति और जागरूक ग्रामीणों की विशेष पहल पर ग्राम पंचायत ने सर्वसम्मति से एक बड़ा ऐतिहासिक निर्णय लिया था। इसके तहत गांव की सीमा के भीतर गुटखा, जर्दा और अन्य तंबाकू उत्पादों की बिक्री एवं सेवन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया था। किसी भी स्थानीय दुकान, होटल या ढाबे पर तंबाकू उत्पाद बेचने की अनुमति नहीं थी। गांव की यह अनोखी और अनुशासित व्यवस्था लगभग दो दशकों तक पूरी सख्ती और सफलता के साथ प्रभावी रही।

आज कैसी है स्थिति?

दुर्भाग्यवश, बदलती जीवनशैली और नशे के नए-घातक स्वरूपों के आगमन के साथ यह पुरानी सामाजिक व्यवस्था धीरे-धीरे कमजोर पड़ती गई। आज स्थिति यह बन चुकी है कि तंबाकू पर पाबंदी लगाने वाले इस गांव में चिट्टा जैसे खतरनाक और जानलेवा नशीले पदार्थ खुलेआम बिक रहे हैं। सार्वजनिक स्थानों पर नशेड़ियों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे राहगीरों, महिलाओं और युवाओं के लिए असुरक्षित माहौल पैदा हो गया है। नशे के कारोबार को रोकने या इसका विरोध करने वाले साहसी लोगों को जानलेवा हमलों का सामना करना पड़ रहा है।

दुकानदार पर हमला

स्थानीय दुकानदार सागरमल ने जब बस स्टैंड के पास दो युवकों को सार्वजनिक रूप से नशा करने से रोका और उनका वीडियो बनाकर पुलिस को भेजा, तो आरोपियों ने रंजिश में आकर उन पर हथियारों से जानलेवा हमला कर दिया। गांव के पूर्व सरपंच द्वारा जब इस अवैध नशे के कारोबार और असामाजिक तत्वों के खिलाफ आवाज उठाई गई, तो आरोपियों ने उनके साथ भी हाथापाई और मारपीट की।

इस पूरी स्थिति को लेकर ग्रामीणों में स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली, विशेषकर संबंधित बीट प्रभारी और बीट कांस्टेबल की भूमिका को लेकर गहरा आक्रोश और अविश्वास व्याप्त है। पूर्व सरपंच गणपतराम बारूपाल का कहना है कि जब पूरा गांव एकजुट था, तब यहां गुटखा तक नहीं बिकता था, लेकिन अब चिट्टा जैसे घातक नशे का कारोबार पैर पसार चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि पुलिस निष्पक्ष और सख्त कार्रवाई करती है, तो पूरा गांव कानून का सहयोग करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

दूसरी ओर, मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन भी सतर्क हुआ है। पुलिस अधीक्षक बी. आदित्य ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया है कि पुलिस नशा बिक्री के मुख्य ठिकानों और अड्डों को चिह्नित कर लगातार दबिश दे रही है। इसके साथ ही, नशे के अवैध कारोबार से अर्जित की गई संपत्तियों को फ्रीज करने और उन्हें ध्वस्त करने की सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है। मक्कासर को इस जहर से मुक्त कराने के लिए पुलिस और ग्रामीणों के बीच कड़े तालमेल की अत्यंत आवश्यकता है।

बड़ी खबरें

View All

हनुमानगढ़

राजस्थान न्यूज़

ट्रेंडिंग