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Rajasthan Cabinet Decision : राजस्थान में सभी विवाहों का 60 दिन के भीतर पंजीकरण अनिवार्य, लिव-इन संबंध पर नया नियम

Rajasthan Cabinet Decision : राजस्थान के सीएम भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में गुरुवार को आयोजित मंत्रिमंडल की बैठक में सभी विवाहों का 60 दिनों के भीतर पंजीकरण कराना अनिवार्य करने का फैसला लिया गया है।
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Rajasthan Cabinet Decision : संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल। फाइल फोटो पत्रिका

Rajasthan Cabinet Decision : सीएम भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में गुरुवार को आयोजित मंत्रिमंडल की बैठक में विवाह, विवाह विच्छेद, उत्तराधिकार, भरण-पोषण तथा लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े कानूनों को व्यवस्थित रूप देने के लिए राजस्थान यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल-2026 के प्रारूपों का अनुमोदन किया गया। प्रेसवार्ता में उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचन्द बैरवा, संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री कन्हैया लाल और उद्योग एवं वाणिज्य राज्य मंत्री के.के. विश्नोई ने मंत्रिमंडल के निर्णयों की जानकारी दी।

विवाह-तलाक का पंजीकरण अनिवार्य

संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने बताया कि राज्य मंत्रिमंडल ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 की भावना के अनुरूप ‘द राजस्थान यूनिफॉर्म सिविल कोड (समान नागरिक संहिता) विधेयक-2026’ के प्रारूप का अनुमोदन किया है। इसे अब विधानसभा के आगामी सत्र में पेश किया जाएगा। इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य राज्य में विवाह, विवाह विच्छेद (तलाक), उत्तराधिकार, भरण-पोषण तथा लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े कानूनों को एक समान, पारदर्शी और व्यवस्थित रूप देना है। इस विधेयक के प्रावधान अनुसूचित जनजातियों पर लागू नहीं होंगे। संविधान के तहत संरक्षित पारंपरिक अधिकारों वाले वर्गों को भी इससे बाहर रखा गया है।

मंत्री जोगाराम पटेल ने बताया कि उच्चतम न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर यह प्रारूप तैयार किया गया है। इसके प्रावधानों के अनुसार विवाह पंजीकरण अनिवार्य एवं बहुविवाह निषेध किया गया है। सभी धर्मों और समुदायों की अपनी-अपनी परंपराओं एवं रीतियों (जैसे- सप्तपदी, निकाह, आनंद कारज, होली यूनियन आदि) के अनुसार विवाह संपन्न कराने की पूर्ण स्वतंत्रता रहेगी।

कानून लागू होने के बाद संपन्न होने वाले सभी विवाहों का 60 दिनों के भीतर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। लिव-इन संबंधों की शुरुआत तथा उनके समापन की लिखित सूचना या पंजीकरण का प्रावधान किया गया है, जिससे दोनों पक्षों के अधिकारों की सुरक्षा हो सकेगी।

15 दिनों के भीतर प्रमाण पत्र होगा जारी

मंत्री जोगाराम पटेल ने बताया कि विवाह या तलाक के पंजीकरण का ज्ञापन मिलने के 15 दिनों के भीतर रजिस्ट्रार को प्रमाण पत्र जारी करना होगा या कारण बताते हुए लिखित में आवेदन खारिज करना होगा। रजिस्ट्रार द्वारा आवेदन खारिज करने पर 30 दिनों के भीतर रजिस्ट्रार जनरल के समक्ष अपील की जा सकेगी, जिसका निस्तारण 60 दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा। केवल

पंजीकरण न कराने पर लगेगा जुर्माना

मंत्री जोगाराम पटेल ने बताया कि पंजीकरण न होने या देरी होने मात्र से कोई विवाह अमान्य नहीं माना जाएगा। पंजीकरण न कराने पर 10 हजार रुपए तक और नोटिस मिलने के बाद भी अनदेखी करने पर 25 हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। जानबूझकर पंजीकरण प्रक्रिया में देरी या उपेक्षा करने वाले रजिस्ट्रार पर रजिस्ट्रार जनरल द्वारा 25 हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।

विवाह के पश्चात उत्पन्न विवादों के निपटारे के लिए स्पष्ट न्यायिक प्रक्रिया तय

मंत्री जोगाराम पटेल ने बताया कि विधेयक में विवाह के पश्चात उत्पन्न विवादों के निपटारे के लिए स्पष्ट न्यायिक प्रक्रिया तय की गई है। संहिता के नियमों के उल्लंघन, जबरन अथवा धोखे से ली गई सहमति, या नपुंसकता सहित अन्य कारणों के आधार पर न्यायालय द्वारा विवाह को शून्य घोषित करने के स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं।

उत्तराधिकार मामले में पुत्र-पुत्री को समान अधिकार दिए गए

मंत्री जोगाराम पटेल ने बताया कि उत्तराधिकार के मामले में पुत्र-पुत्री को समान अधिकार दिए गए हैं। यदि किसी व्यक्ति की बिना वसीयत बनाए मृत्यु होती है, तो उसकी संपत्ति का हस्तांतरण निर्धारित प्राथमिकता क्रम के अनुसार किया जाएगा। इसके लिए तीन श्रेणियां निर्धारित की गई हैं।

1- प्रथम श्रेणी में जीवित पति व पत्नी, उनके जीवित बच्चों, मृत बच्चों के पति व पत्नी एवं बच्चों तथा माता-पिता को रखा गया है।
2- दूसरी श्रेणी में सौतेले माता-पिता, भाई-बहन, दिवंगत भाई-बहन के पति-पत्नी एवं बच्चों, माता-पिता के भाई-बहन, दादा-दादी, नाना-नानी को रखा गया है।
3- अन्य श्रेणी में पहली दो श्रेणी के अलावा अन्य रिश्तेदारों को रखा गया है।

यदि इन श्रेणियों में कोई भी कानूनी उत्तराधिकारी नहीं मिलता है, तो संपत्ति सरकार के पास जाएगी, लेकिन सरकार भी संपत्ति से जुड़ी सभी देनदारियों व दायित्वों के अधीन होगी। मृत्यु के समय गर्भ में मौजूद शिशु (जो बाद में जीवित जन्मा हो) को भी उत्तराधिकार का पूरा कानूनी अधिकार प्राप्त होगा।