
- कॉलोनी में दिग्गज नेताओं ने डाला था डेरा,32 सालों से मरम्मत के लिए नहीं बजट
- सरकारी कार्यालयों के काम आने सहित बन सकता है उप स्वास्थ्य केेंद्र
-योगेन्द्र गुप्ता
संगरिया. देश के दिग्गज नेताओं का रहवास रही सिंचाई कॉलोनी खंडहर में तबदील हो रही है। पिछले कई सालों से न तो भवनों का इस्तेमाल हो रहा ना ही दशा सुधारी जा रही है। इसके चलते खाली पड़े भवन खंडहर में तबदील हो चुके। कुछ जर्जर हाल ढहने के कगार पर हैं। आलम ये है कि जहां एक ओर भवनों के अभाव में अनेक सरकारी दफ्तर किराए के परिसरों में चल रहे हैं वहीं दूसरी ओर बदहाल हो रहे कॉलोनी भवनों की मरम्मत के लिए विभाग के पास पैसा नहीं है।
-दिग्गज ठहरे, अब बदहाल
सन् 1956 में सार्दुल ब्रांच नहर आने के बाद 1960 में बनी इस सिंचाई कॉलोनी के विश्रामगृह में देश के प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, राष्ट्रपति भैरोंसिंह, मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाडिय़ा व हरिदेव जोशी, ललितकिशोर चतुर्वेदी, हरिकृष्ण भाभड़ा जैसे कई दिग्गज नेता ठहर चुके। लेकिन बजट व सार संभाल के अभाव में हाल बदहाल हैं। कॉलोनी की परकोटा दीवार क्षतिग्रस्त होने से वाहनों की आवाजाही पर रोक-टोक नहीं है।
जल संसाधन एईएन कार्यालय के सामने खुले पड़े बिजली ट्रांसफॉर्मर, टेढे खंबे की तारें तथा जंक्शन बॉक्स हादसे को आमंत्रित कर रहे हैं। चारों ओर घास, बुई व आक उगे हैं। आवासीय क्वाटर्स की राह में गिरे पेड़ नहीं हटाए। पिछला द्वार, सीढियां क्षतिग्रस्त हैं। क्रिकेट खेलते समय झाडिय़ों में जीव-जंतुओं के डर से बच्चे गेंद लेने तक घुसने से परहेज करते हैं।
-भूतहा बनी जगह
जेईएन आवास व एसडीओ कोठी खस्ताहाल हैं। छतें, दीवारें, जंगले उखड़ चुके। कभी गंग कैनाल लिंक चैनल व अधिशाषी अभियंता विद्युत एवं ग्रामीण क्षेत्र का कार्यालय रहे भवन के दरवाजे खिड़कियां लोग उखाड़ ले गए। इन भूतहा बनी जगहों का अब असामाजिक तत्वों का बोलबाला है। 33 सरकारी आवासों में करीब दस आवंटित है जबकि शेष खाली पड़े है। अधिकांश खस्ताहाल होने व स्टाफ नहीं होने से रहने योग्य नहीं है।
-कार्मिकों की कमी से नहर बेहाल
कार्मिकों की कमी से विभागीय काम के साथ नहर का रखरखाव बाधित है। हैड पर सात कर्मियों की जरुरत है पर दो हैं। विभाग में एक जिलेदार, दो एलडीसी, दो जेईएन व पांच पटवारियों के पद रिक्त हैं। जबकि दो एलडीसी, दो सहायक कर्मचारी, चार जेईएन तथा एक एईएन उमेश शर्मा कार्यरत हैं। इसके चलते तकनीकी कार्यों में परेशानी होती है।
-नहीं हुआ संरक्षण
पर्यावरण संरक्षण व हरियाली के निमित्त पश्चिमी दिशा में नहर के पास लगाए पौधे उखाडक़र लोगों ने जमीन पर कब्जा कर लिया। कॉलोनी में पड़े सूखे पेड़ों के साथ हरे व सूख चुके पेड़ दीमक जैसे बीमारी से खराब होते जा रहे हैं।
-नहीं मिली फूटी कौड़ी
नहर समीप जमीन से तीन फुट नीचे हुई कॉलोनी के पिछवाड़े सरकारी जमीन पर कूड़ा कर्कट व गंदगी डालने से वातावरण प्रदूषित हो रहा है। जीर्णोद्धार के नाम पर पिछले 32 सालों से फूटी कौड़ी आवंटित नहीं हुई। रेस्ट हाऊस का जीर्णोद्धार जरुर हुआ है।
-सरकारी दफ्तरों के लिए हो सदुपयोग
पूर्व पार्षद जगदीश सागर व लखन करवा तथा अध्यापक सतीश गुंबर का कहना है कि किराए के भवनों में चल रहे आबकारी थाना, उप कोषागार, सीडीपीओ जैसे कार्यालयों के लिए इनका प्रयोग हो सकता है। अभिवन टीम सदस्य एडवोकेट रविंद्र भोबिया बताते हैं कि कई बार कॉलोनी के खंडहर भवन टीम को सौंपने की मांग की गई। यदि सरकार मौका दे तो टीम अपने स्तर पर जन सहयोग से यहां उप स्वास्थ्य केंद्र संचालित करवा सकती है। वहीं खाली जगह पर खेल मैदान/स्टेडियम का निर्माण करवाने को तैयार हैं।
-अभिवन टीम ने बनाया पार्क
सरकार उदासीन रही जिसकी बानगी खंडहर भवन आज भी हैं। कभी रैलिंग, लाईटों, फूलदार पौधों से सुसज्जित अभ्यारण्य रही कॉलोनी के चारों ओर घास-फूस व कंटीले पौधों से घिरे अधिकांश हिस्से को हालांकि अभिनव टीम ने अपने स्तर पर जन सहयोग से नया रुप दे दिया है। कॉलोनी में हरे-भरे फूलों से महकता एक अभिनव पार्क बना दिया। जिसमें तीज-त्यौहार पर आयोजन होते हैं।
बैठने के लिए बैंच, हरी घास, बच्चों को खेलने के लिए झूले आदि दो घड़ी सूकून देते हैं। सुबह-शाम घूमने और प्रकृति का आनंद उठाने के लिए लोगों की आवाजाही लगी रहती है। टीम सदस्य प्रमोद डेलू एडवोकेट, भूपेंद्र भोबिया, प्रवेश स्वामी आदि बताते हैं कि यदि सरकारी खंडहर भवन भी टीम को मिले तो कॉलोनी की कायापलट हो जाए। बावजूद इसके आगे व पीछे की ओर खस्ता हाल भवन पार्क की छटा पर चांद पर दाग समान हैं।
-नहीं है बजट प्रावधान
जल संसाधन विभाग कनिष्ठ अभियंता गोविंद जायसवाल के अनुसार खडंहर भवन सुधार निमित्त कोई बजट प्रावधान नहीं है। ना ही ऐसे कोई आदेश मिले हैं। वर्तमान में करीब बीस सूखे पेड़ नीलामी योग्य पसिर में पड़े हैं। दो साल पूर्व करीब 18 लाख रुपए में पेड़ों की नीलामी हुई थी।