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-इंदिरागांधी नहर के चार में एक समूह के रेग्यूलेशन पर मोहर
हनुमानगढ़.
भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) की बैठक मंगलवार को चंडीगढ़ में हुई। इसमें बांधों में कमजोर आवक के कारण दस अगस्त के बाद राजस्थान के शेयर में करीब दो हजार क्यूसेक पानी की कटौती करने का निर्णय किया गया। इस तरह दस अगस्त से राजस्थान का शेयर घटाकर 9600 क्यूसेक कर दिया गया है। जबकि इससे पहले प्रदेश का शेयर 11000 क्यूसेक के करीब था। बैठक में राजस्थान का प्रतिनिधित्व करने वाले जल संसाधन उत्तर संभाग हनुमानगढ़ के मुख्य अभियंता केएल जाखड़ ने बताया कि शेयर में कटौती के कारण दस अगस्त के बाद प्रदेश की इंदिरागांधी नहर के वर्तमान रेग्यूलेशन को यथावत रखना संभव नहीं होगा।
पौंग बांध 43 फीट नीचे
पौंग बांध का जल स्तर छह अगस्त 2017 को 1362.85 फीट था, जो वर्ष 2018 में घटकर 1319.76 फीट चला गया है। यानी गत वर्ष की तुलना में यह बांध अब तक 43 फीट खाली है। जबकि मानसून का आधे से ज्यादा वक्त गुजर गया है।
इन जिलों को मिलता पानी
इंदिरागांधी नहर से प्रदेश के हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, बीकानेर, चूरू, जोधपुर, नागौर, बाड़मेर, जैसलमेर, सीकर, झुंझुंनू आदि जिलों को पानी मिलता है। इस नहर से दो करोड़ से अधिक लोगों की प्यास बुझती है।
कीट-बीमारियों के प्रकोप से नरमा हो रहा नरम
श्रीगंगानगर। खरीफ की प्रमुख फसल नरमा कीट-बीमारियों के प्रकोप से नरम हो रही है। खाट लबाना सहित कई जगह अधिक असर देखने में आ रहा है। ग्रामीण मंसाराम, धर्मचंद, सिकन्दर सिंह, रमेश कुमार के अनुसार सफेद मक्खी, काला मच्छर, कातरा आदि परेशानी का सबब बने हुए हैं। इनकी वजह से पत्ते मुड़ रहे हैं। पौधे का विकास बाधित हो रहा है, बाद में यह समाप्त हो जाता है।
कृषि विभाग के सहायक निदेशक डॉ. रमेशचंद्र बराला ने बताया कि सफेद मक्खी के बाद जेसिड के प्रकोप की कुछ बात सामने आई है। पहले थ्रिप्स का असर भी कई जगह देखा गया था। उनके अनुसार विभाग का स्टाफ किसानों को कीटों-रोगों के लक्षण, बचाव के उपाय आदि के बारे में किसानों को बता रहा है।
उधर, कृषि अनुसंधान केंद्र की मंगलवार को जारी मौसम आधारित कृषि साप्ताहिकी के अनुसार नरमा-कपास में खरपतवार नहीं पनपने दें। चितकबरी सूंडी का प्रकोप दिखाई देने पर नीम की निम्बोली एवं सिफारिश के अनुसार अन्य उपाय करने चाहिए। हरा तेला एवं थ्रिप्स की रोकथाम के उपाय भी करने चाहिए।