
हरदा/बालागांव. करीबी गांव मगरधा में स्थित गजानंद फिलिंग स्टेशन से पानी मिला पेट्रोल बेचे जाने का मामला बुधवार को उजागर हुआ। पेट्रोल भराकर जाने वाले ग्रामीणों के वाहन कुछ दूर जाकर बंद होने पर उन्होंने मैकेनिक को दिखाया तो पेट्रोल में पानी मिलेे होने की बात पता चली। इसके बाद बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने पंप पहुंचकर बॉटल में पेट्रोल लेकर उसकी हकीकत जानी तो मामला सही मिला। इस पर ग्रामीणों ने जमकर हंगामा किया। लोगों के बढ़ते विरोध को देखते हुए पंप के संचालक ने लोगों के पैसे वापस किए।वहीं पंप का संचालन बंद किया।
जार में पेट्रोल की जगह निकला पानी
उल्लेखनीय है कि हरदा से 24 किमी दूरी पर स्थित गांव मगरधा में गजानंद फिलिंग स्टेशन से भारत पेट्रोलियम का डीजल, पेट्रोल विक्रय किया जाता है। वनांचल होने के कारण इस पंप से प्रतिदिन करीब 30 गांवों के लोग ईधन लेते हैं। सुबह करीब 23 ग्राहकों ने यहां से पेट्रोल लेकर निकले थे, किंतु सभी के वाहन कुछ दूरी पर जाकर बंद हो गए। काफी कोशिश करने के बाद भी बाइक स्टार्ट नहीं हुई तो उन्होंने मोटर साइकिल को मैकेनिक के पास ले गए। उसके द्वारा पेट्रोल टैंक की नली को खोला गया तो उसमें पेट्रोल की जगह पानी निकलने लगा। यह देखकर ग्रामीण और मैकेनिक अचंभित हो गए। लगभग आधे घंटे में कई लोग मैकेनिकों के पास वाहन लेकर पहुंचे। पेट्रोल में पानी मिलने की पुष्टि करने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण पंप पहुंचे। उन्होंने पंप पर रखे जार में पेट्रोल निकाला तो उसमें पेट्रोल की जगह पानी निकला। इस पर ग्रामीणों ने जमकर हंगामा किया। विवाद की स्थिति बनती देखकर रहटगांव पुलिस और डायल १०० को सूचना दी गई। आरक्षक विजय बकोरियों ने लोगों का समझाईश देकर पेट्रोल की बिक्री बंद कराई।
पंप संचालक ने ग्राहकों के लौटाए पैसे
जब ग्राहकों द्वारा पंप पर गड़बड़ी को लेकर विवाद की स्थिति बनने लगी तो पंप के महेंद्रङ्क्षसह किरार न ग्राहकों ने जितने रुपए का पेट्रोल भराया था, उतने पैसे लौटा दिए। लगभग २३ ग्राहकों ने करीब ६० लीटर पेट्रोल खरीदा था। इसके अलावा पानी मिले पेट्रोल की वजह से वाहनों के कार्बोरेटर खराब हो गए। पेट्रोल की वजह से वाहन बिगडऩे को लेकर भी ग्राहकों ने हंगामा किया। मैनेजर किरार ने ग्राहकों से वाहन सुधार का खर्च देने की बात कही गई। इसके बाद लोग शांत हुए।
एक हजार लीटर पेट्रोल हुआ पानी
पंप मैनेजर महेंद्र सिंह किरार ने बताया कि मंगलवार सुबह मागल्या डिपो इंदौर से 9000 लीटर पेट्रोल आया था, जिसे टैंक में भरा गया था। वहीं पूर्व से पंप के टैंक में 108 3 लीटर के करीब पेट्रोल था। इस तरह कुल टैंक में करीब 1008 3 लीटर पेट्रोल का स्टॉक था। उन्होंने बताया कि पेट्रोल गुणवत्ता में एथेनॉल की मात्रा दस प्रतिशत मिक्स होती है। इथेनॉल एक ज्वलनशील पदार्थ है। टैंक में शायद कुछ मात्रा में पानी होगा, जिससे इथेनॉल और पानी एक दूसरे के संपर्क में आने से टैंक में अनुमानित 1000 लीटर के करीब पेट्रोल पानी मे परिवर्तित हो गया। उसी कारण से यह समस्या उत्पन्न हुई है।
यह है इथेनॉल और पानी का गुण
पेट्रोल में दस फीसदी एथेनॉल मिला होता है। यह फैसला सरकार ने इसलिए लिया है, क्योंकि ये गाडिय़ों के प्रदूषण को कम करने के साथ-साथ कच्चे तेल के आयात में होने वाले खर्च को भी कम करता है। जब यह एथेनॉल युक्त पेट्रोल वाहनों की धुलाई या बरसात के वक्त पानी के संपर्क में आता है तो रासायनिक गुण के कारण एथेनॉल पानी या नमी के साथ मिलते ही पानी बन जाता है। यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। पानी की बहुत कम मात्रा भी पेट्रोल में मौजूद एथेनॉल को अलग करने के लिए काफी है। इससे एक लेयर बन जाती है जो कार या बाइक के पेट्रोल टैंक की निचली सतह पर जमा हो जाती है। अगर ऐसा होता है तो गाड़ी के स्टार्ट होने में समस्या आ सकती है।
इनका कहना है
पेट्रोलियम कंपनी पेट्रोल में एथेनॉल मिलाकर दे रही है। एथेनॉल एक प्रोडक्ट होता है। तल में पानी होने के कारण पानी से क्रिया होने से पेट्रोल पानी बन गया। कंपनी द्वारा पूर्ण जांच कर पानी निकाला जाएगा और लिक्विड से शुद्धता की जांच करने के बाद ही पुन: बिक्री चालू होगी।
सीताराम कोठारे, खाद्य आपूर्ति अधिकारी, हरदा