
Early Signs of Liver Problems : लिवर हमारे शरीर का एक बहुत जरूरी हिस्सा है। ये न सिर्फ खाना पचाने में मदद करता है, बल्कि शरीर में जमा ज़हरीले पदार्थों को भी बाहर निकालता है और ऊर्जा को स्टोर करके रखता है। लेकिन आज की भागदौड़ भरी और अनहेल्दी लाइफस्टाइल की वजह से लिवर से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। इनका सही वक्त पर इलाज होना बहुत ज़रूरी है। आइए, सीनियर हेपेटोलॉजिस्ट डॉ. राहुल रॉय से जानते हैं कि लिवर की सेहत कैसे बनाए रखें।
इसमें लिवर (Liver) में तेज सूजन होती है, जो गंदे पानी या दूषित खाने से होती है। इससे हेपेटाइटिस ए और ई होता है। लक्षणों की जल्दी पहचान हो जाती है तो इलाज समय पर हो जाता है।
ये धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाती हैं, जैसे क्रॉनिक हेपेटाइटिस बी एवं सी, जो दूषित खून से होती हैं। अल्कोहल का सेवन या फिर लिवर में अधिक चर्बी का जमा हो जाना, जिसे फैटी लिवर कहा जाता है।
क्रॉनिक लिवर बीमारियों में शुरुआती समय में लक्षण नहीं दिखते। गंभीर अवस्था में आंखें और पेशाब पीला हो जाना, भूख कम होना, मितली, उल्टी, थकावट और खून की उल्टियां हो सकती हैं।
अगर लिवर कोई लक्षण नहीं दे रहा है तो नियमित चेकअप कराना जरूरी है, ताकि बीमारी का समय पर पता चल सके। नजदीकी लैब में जाकर ब्लड टेस्ट कराएं, जिससे हेपेटाइटिस बी और सी वायरस की जांच हो सकती है। यदि प्लेटलेट्स कम हों या SGOT-SGPT बढ़े मिले तो तुरंत सोनोग्राफी कराकर उचित उपचार शुरू करें।
रोज 30 मिनट तेज चलें, साइकिल चलाएं या योग करें। हरी सब्जियां, फल और फाइबर युक्त आहार लें। तला-भुना, मिठाई और फास्ट फूड से बचें। बिना डॉक्टर की सलाह दवा न लें। हेपेटाइटिस बी का टीका लगवाएं, बीपी, डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल में रखें।
बीमारी का शुरुआती पता चलने पर संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, दवाओं और शराब से दूरी बना इसे ठीक किया जा सकता है। पीलिया में मरीज को साफ पानी और सामान्य खाना दें, उबला खाना नहीं। घरेलू नुस्खों से बचें, 5-10% वजन कम करने से सुधार संभव है।
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