Betul Health Alert: मध्य प्रदेश के बैतूल में दूषित पानी की वजह से बच्चों में स्किन बीमारी फैल रही है। दिग्विजय सिंह ने प्रशासन से तुरंत कार्रवाई की मांग की।
Betul Health Alert: मध्य प्रदेश के बैतूल जिले से एक चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां बच्चों में तेजी से त्वचा संबंधी बीमारियां फैल रही हैं। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री Digvijaya Singh ने गहरी चिंता जताई है और प्रशासन से तुरंत कार्रवाई की मांग की है।
यह पूरा मामला बैतूल जिले के घोड़ाडोंगरी ब्लॉक के दानवखेड़ा गांव का है। यहां अचानक बच्चों में खुजली (स्केबीज), सर्दी, खांसी और बुखार जैसी समस्याएं बढ़ने लगीं। बताया जा रहा है कि करीब 20 बच्चे इन बीमारियों से प्रभावित हैं।
जानकारी के मुताबिक, गांव में दूषित पानी पीने की वजह से ये समस्या बढ़ी है। साफ पानी की कमी के कारण बच्चों की सेहत पर सीधा असर पड़ रहा है, जिससे स्किन इन्फेक्शन और अन्य बीमारियां फैल रही हैं। जैसे ही मामला सामने आया, जिला प्रशासन ने गांव में मेडिकल कैंप लगाया। डॉक्टरों की टीम बच्चों और अन्य प्रभावित लोगों का इलाज कर रही है और हालात पर नजर रखी जा रही है।
Digvijaya Singh ने बताया कि करीब 6 महीने पहले भी इसी तरह की बीमारी फैली थी, जिसमें कुछ बच्चों की मौत तक हो गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय प्रशासन ने जरूरी कदम नहीं उठाए, जिसके कारण फिर से ऐसी स्थिति बन गई। Digvijaya Singh ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि प्रशासन ने समय रहते ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों की जान के साथ इस तरह की लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
गांव के लोग लंबे समय से साफ पीने के पानी की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक पानी की समस्या हल नहीं होगी, तब तक बीमारी भी खत्म नहीं होगी। लोग इस मुद्दे को लेकर विरोध भी कर रहे हैं।
Digvijaya Singh ने सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि गांव में तुरंत साफ पानी की व्यवस्था की जाए। पानी के स्रोत की जांच की जाए। बच्चों को बेहतर इलाज दिया जाए। लापरवाह अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, 15 मार्च को इस मामले की जानकारी मिली थी, जिसके बाद तुरंत मेडिकल टीम भेजी गई। फिलहाल इलाज जारी है और स्थिति को कंट्रोल करने की कोशिश की जा रही है।
यह घटना साफ दिखाती है कि गांवों में आज भी साफ पानी और हेल्थ सुविधाओं की कमी है। खासकर बच्चों के लिए यह बेहद खतरनाक हो सकता है। अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या और भी गंभीर हो सकती है।