
Engineered Blood Clots (Image- gemini)
Engineered Blood Clots: अक्सर एक्सीडेंट के मामलों में सबसे ज्यादा जान इसलिए जाती है क्योंकि अस्पताल पहुंचने से पहले ही शरीर का बहुत सारा खून बह जाता है। पट्टी बांधने या दबाने के बाद भी कई बार खून रुकता नहीं है। नेचर जर्नल में प्रकाशित (Engineering tough blood clots for rapid haemostasis and enhanced regeneration) शोध में वैज्ञानिकों ने इसका एक इलाज ढूंढ लिया है। उन्होंने ऐसे नकली ब्लड क्लॉट्स (खून के थक्के) बनाए हैं जो चोट वाली जगह पर जाते ही खून को तुरंत जमा देते हैं। यानी अब खून बहने की वजह से किसी की जान जाना गुजरे जमाने की बात हो जाएगी।
नॉर्थ कैरोलिना स्टेट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक खास तरह का सिंथेटिक मटीरियल तैयार किया है जो हमारे शरीर के नेचुरल प्लेटलेट्स की तरह काम करता है। ये शरीर में जाते ही उन सेल्स के साथ जुड़ जाता है जो खून जमाते हैं। इसमें बहुत छोटे कणों का इस्तेमाल किया गया है जो केवल चोट वाली जगह पर ही एक्टिव होते हैं और वहां एक जाल जैसा बना देते हैं, जिससे खून बाहर नहीं निकल पाता।
आमतौर पर शरीर को खून जमाने में थोड़ा समय लगता है, लेकिन इस नई तकनीक की मदद से यह काम बहुत तेज हो जाता है। जानवरों पर किए गए टेस्ट में देखा गया कि यह तकनीक उन घावों पर भी असरदार है जहां पट्टियां या दवाएं काम नहीं कर पातीं। यह कुछ ही सेकंड में बहते हुए खून को रोकने में सक्षम है, जो कि इमरजेंसी के मामलों में किसी वरदान से कम नहीं है।
सड़क हादसों में घायल लोगों को अस्पताल ले जाते समय ब्लीडिंग रोकना आसान होगा। घायलों की जान बचाने के लिए यह तकनीक बहुत कारगर साबित हो सकती है। ऑपरेशन के दौरान जब ज्यादा खून बहने का खतरा होता है, तब डॉक्टर इसका इस्तेमाल कर सकेंगे। जिन लोगों का खून आसानी से नहीं जमता (जैसे हीमोफीलिया), उनके लिए भी यह उम्मीद की किरण है।
फिलहाल इस पर अभी और भी रिसर्च चल रही है ताकि इसे इंसानों के लिए पूरी तरह सुरक्षित बनाया जा सके। अगर सब कुछ ठीक रहा, तो आने वाले कुछ सालों में यह तकनीक हर एम्बुलेंस और फर्स्ट एड किट का हिस्सा होगी। यह मेडिकल साइंस की दुनिया में एक ऐसी जीत है जो लाखों लोगों को मौत के मुंह से वापस ला सकती है
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Published on:
11 May 2026 09:19 am
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