
TB Outbreak Delhi (Image- gemini)
TB Outbreak Delhi: दिल्ली में टीबी के ताजा आंकड़ों ने एक बार फिर सबको डरा दिया है। सिर्फ डेढ़ महीने में 12 हजार नए मरीज मिलना छोटी बात नहीं है। इससे साफ पता चलता है कि टीबी की बीमारी हमारे बीच कितनी गहराई तक फैली हुई है। प्रधानमंत्री का टीबी मुक्त भारत का सपना पूरा करने के लिए अभी बहुत लंबी लड़ाई लड़नी होगी। अच्छी बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग अब अस्पतालों में बैठकर मरीजों का इंतजार नहीं कर रहा, बल्कि खुद उनके दरवाजे तक पहुंच रहा है। हैंडहेल्ड एक्स-रे जैसी नई और छोटी मशीनों की मदद से उन इलाकों में भी टेस्ट किए गए जहां लोग पहले शर्म या डर की वजह से जांच नहीं करवाते थे। अब सवाल यह है कि आखिर दिल्ली में टीबी के मामले इतनी तेजी से क्यों बढ़ रहे हैं और इसके शुरुआती लक्षण क्या हैं?
दिल्ली स्वास्थ्य विभाग ने उन इलाकों पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जहां आबादी बहुत घनी है और लोग छोटे-छोटे कमरों में रहते हैं। पहली बार ऐसी मशीनों का इस्तेमाल हुआ जिन्हें डॉक्टर हाथ में लेकर कहीं भी जा सकते थे। इससे मौके पर ही छाती का एक्स-रे हुआ और तुरंत पता चल गया कि किसे परेशानी है।
स्वास्थ्य कर्मी खुद लोगों के घर गए और उन लोगों को ढूंढा जिन्हें कई दिनों से खांसी थी। इससे वो मरीज भी सामने आ गए जो अस्पताल जाने से कतरा रहे थे। अप्रैल-मई के बीच चले इस खास अभियान ने उन मरीजों को ढूंढ निकाला जो अनजाने में अपने परिवार और पड़ोसियों को भी बीमार कर रहे थे।
टीबी कोई छुआछूत की बीमारी नहीं है कि हाथ लगाने से फैल जाएगी, बल्कि यह हवा के जरिए एक से दूसरे इंसान में पहुंचती है। जब फेफड़ों वाली टीबी का कोई मरीज खांसता, छींकता या थूकता है, तो उसके मुंह और नाक से टीबी के बैक्टीरिया (जीवाणु) बहुत बारीक बूंदों के रूप में हवा में फैल जाते हैं। अगर कोई स्वस्थ व्यक्ति उस हवा में सांस लेता है, तो ये कीटाणु उसके फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं। अगर कोई कमरा छोटा है, वहां धूप और ताजी हवा नहीं आती, तो वहां टीबी के फैलने का खतरा सबसे ज्यादा होता है।
सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन Centers for Disease Control and Prevention) के अनुसार, टीबी के इन शुरूआती लक्षणों को बिलकुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Published on:
10 May 2026 10:08 am
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