9 मई 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

आप डिप्रेशन में तो नहीं जा रहे? अब ब्लड टेस्ट से मिल सकता है इसका संकेत

Blood Test For Depression: डिप्रेशन को पहचानना अब पहले से कहीं ज्यादा आसान होने वाला है। न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी की एक नई रिसर्च में पता चला है कि हमारे खून में मौजूद कुछ खास सेल्स की 'उम्र' यह बता सकती है कि हम कितने तनाव या डिप्रेशन में हैं। यह खोज डॉक्टरों के लिए मरीज के मन की स्थिति को समझना वैसा ही आसान बना देगी जैसे शरीर की दूसरी बिमारियां पकड़ में आती हैं।

2 min read
Google source verification

भारत

image

Nidhi Yadav

May 09, 2026

Blood test for depression research , Monocyte aging mental health link , NYU depression study 2026,

Blood Test For Depression (Image- gemini)

Blood Test For Depression: जब हमें डिप्रेशन होता है, तो डॉक्टर हमसे कई सवाल पूछते हैं और हमारी बातों से बीमारी का अंदाजा लगाते हैं। लेकिन दिक्कत यह है कि कई बार हम अपनी मानसिक तकलीफ को शब्दों में सही से बता नहीं पाते। अब वैज्ञानिकों ने इसका तोड़ निकाल लिया है। न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी (NYU) की डॉ. निकोल बीलियू पेरेज की स्टडी में सामने आया है कि हमारे शरीर के खास सुरक्षा सेल्स (इम्यून सेल्स) और हमारी दिमागी सेहत के बीच एक गहरा नाता है। अब खून की एक जांच से ही डिप्रेशन का पता लगाया जा सकेगा।

इम्यून सेल्स की उम्र से पता चलेगा डिप्रेशन

वैज्ञानिकों ने इस रिसर्च के लिए हमारे खून में मौजूद मोनोसाइट्स (Monocytes) नाम के व्हाइट ब्लड सेल्स की बारीकी से जांच की। ये सेल्स हमारे शरीर को बिमारियों से बचाते हैं। स्टडी में देखा गया कि जो महिलाएं बहुत ज्यादा निराशा, उदासी या नाकामी के अहसास से जूझ रही थीं, उनके ये सेल्स अपनी असली उम्र से कहीं ज्यादा बूढ़े नजर आ रहे थे। इसका मतलब यह है कि हमारे मन की उदासी और डिप्रेशन न केवल हमें दिमागी तौर पर थकाते हैं, बल्कि हमारे शरीर के सेल्स को भी समय से पहले बूढ़ा बना देते हैं।

शारीरिक लक्षण क्या होते हैं?

अक्सर डिप्रेशन में नींद न आना, भूख कम लगना या थकान महसूस होना जैसे लक्षण दिखते हैं, लेकिन ये लक्षण तनाव या किसी दूसरी बीमारी की वजह से भी हो सकते हैं। डॉ. पेरेज की इस खोज की खास बात यह है कि सेल्स की उम्र का यह सिग्नल केवल मन की उदासी और निराशा से जुड़ा था, न कि थकान या भूख में बदलाव से। इसका मतलब है कि यह टेस्ट सीधे तौर पर दिमाग और मन के डिप्रेशन को पकड़ने में मदद करेगा।

HIV के मरीजों के लिए ज्यादा जरुरी क्यों?

The Journals of Gerontology, Series A: Biological Sciences and Medical Sciences में हुई यह स्टडी 440 महिलाओं पर की गई, जिनमें से कुछ HIV के साथ जी रही थीं और कुछ स्वस्थ थीं। डेटा में यह पता चला कि यह ब्लड सिग्नल दोनों तरह की महिलाओं में एक जैसा ही था। खासकर HIV के मरीजों के लिए यह बहुत जरूरी है, क्योंकि उनमें डिप्रेशन की वजह से इलाज (एन्टीरेट्रोवाइरल थेरेपी) पर बुरा असर पड़ता है। समय रहते डिप्रेशन की पहचान होने से उनकी पूरी सेहत को बिगड़ने से बचाया जा सकता है।

कब शुरू होगा यह टेस्ट?

हालांकि यह खोज बहुत बड़ी है, लेकिन अभी इसे अस्पतालों में आने में थोड़ा समय लगेगा। वैज्ञानिकों को अभी यह समझना है कि क्या ये सेल्स डिप्रेशन शुरू होने से पहले ही बूढ़े दिखने लगते हैं या इलाज के बाद इनकी उम्र फिर से सामान्य हो सकती है। फिलहाल यह रिसर्च इलाज की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिससे आने वाले समय में डॉक्टरों को ट्रायल और एरर की जरूरत नहीं पड़ेगी।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।