Control blood sugar by weight lifting : अक्सर लोग मानते हैं कि डायबिटीज़ को केवल मीठा खाना छोड़कर नियंत्रित किया जा सकता है, जबकि इसके प्रबंधन के लिए लाइफ स्टाइल में बदलाव की जरूरत होती है। इनमें वेट लिफ्टिंग जैसी कसरत को शामिल करना बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है, जिससे ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।
Control blood sugar by weight lifting : भारत में मधुमेह (Diabetes) डायबिटीज़ की समस्या तेजी से बढ़ रही है, और 2045 तक इसके 134 मिलियन मामलों तक पहुंचने का अनुमान है। इसका प्रबंधन केवल चीनी से परहेज करने तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक लाइफ स्टाइल में बदलाव की आवश्यकता है। इन बदलावों में वेट लिफ्टिंग (वजन उठाने वाली कसरत) का विशेष महत्व है।
2019 में, भारत में 77 मिलियन वयस्क डायबिटीज़ (Diabetes) से पीड़ित थे, और यह संख्या 2045 तक 134 मिलियन तक बढ़ने की उम्मीद है। डायबिटीज़ के प्रति कम जागरूकता और गलत धारणाएं इस समस्या को और बढ़ा रही हैं। लोग अक्सर सोचते हैं कि सिर्फ मीठा खाना बंद करके डायबिटीज़ (Diabetes) को नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए लाइफ स्टाइल में बदलाव आवश्यक है।
डायबिटीज़ (Diabetes) को नियंत्रण में रखने के लिए नियमित रूप से शारीरिक गतिविधि करना , संतुलित आहार, तनाव कम रखना और अच्छी नींद की जरूरत होती है। वेट लिफ्टिंग इनमें एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। भारत में "स्किनी फैट सिंड्रोम" या वाई-वाई पैराडॉक्स भी डायबिटीज़ (Diabetes) के बढ़ने का प्रमुख कारण है। इस स्थिति में लोग सामान्य वजन के होते हुए भी मेटाबोलिक समस्याओं, जैसे डायबिटीज़ के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।
वेट लिफ्टिंग (Weight lifting) या रेज़िस्टेंस ट्रेनिंग एक प्रकार की कसरत है, जिसमें मांसपेशियों की ताकत और सहनशक्ति को बढ़ाया जाता है। इसमें वजन उठाना, रेज़िस्टेंस बैंड का इस्तेमाल करना और शरीर के वजन का उपयोग करके खींचने, धकेलने और उठाने जैसी गतिविधियां शामिल होती हैं। यह मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाता है और हड्डियों की सेहत को बढ़ावा देता है।
वेट लिफ्टिंग (Weight lifting) न केवल हृदय रोग के जोखिम को कम करती है और मांसपेशियों की मजबूती बढ़ाती है, बल्कि यह डायबिटीज़ (Diabetes) को नियंत्रण करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वेट लिफ्टिंग (Weight lifting) करने से शरीर की इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ती है। जब आप वजन उठाते हैं, तो आपकी मांसपेशियों में सूक्ष्म दरारें पड़ती हैं, और जब शरीर इन्हें ठीक करता है, तो यह इंसुलिन के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाता है।
मांसपेशियां ग्लूकोज के लिए स्पंज की तरह काम करती हैं। वेट लिफ्टिंग (Weight lifting) के दौरान और बाद में, मांसपेशियां ब्लड से शुगर को खींचती हैं, जिससे शुगर लेवल को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। अधिक मांसपेशियां होने का मतलब है कि आपके शरीर में अधिक ग्लूकोज स्टोर करने की जगह होती है, जैसे आप अपने घर में अधिक सामान रखने के लिए अधिक अलमारी रखते हैं।
निरंतर लाभ
वेट लिफ्टिंग (Weight lifting) का प्रभाव केवल कसरत के दौरान ही नहीं, बल्कि उसके बाद भी रहता है। यह मेटाबॉलिज्म को तेज करता है, जिससे वजन नियंत्रण में मदद मिलती है, जो डायबिटीज़ (Diabetes) के प्रबंधन में एक महत्वपूर्ण कारक है। 2018 में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, जो लोग नियमित रूप से वेट लिफ्टिंग करते हैं, उनमें टाइप 2 डायबिटीज़ और हृदय रोग का जोखिम काफी कम होता है।
डायबिटीज़ (Diabetes) के प्रबंधन में सही पोषण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। एक संतुलित आहार न केवल शुगर लेवल को नियंत्रित करता है, बल्कि वजन प्रबंधन में भी मदद करता है। कार्बोहाइड्रेट का संतुलन, प्रोटीन की मात्रा बढ़ाना, और आहार में अधिक फाइबर शामिल करना आवश्यक है।
डायबिटीज़ (Diabetes) का प्रबंधन केवल एक पहलू पर ध्यान देने से नहीं हो सकता। इसके लिए व्यायाम और सही आहार दोनों का संयोजन जरूरी है। वेट लिफ्टिंग (Weight lifting) जैसी गतिविधियां न केवल शरीर को फिट रखती हैं, बल्कि शुगर लेवल को भी नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।