क्रॉलिंग एक शारीरिक व्यायाम है। ये मानव उत्पत्ति का एक हिस्सा है। बच्चा जब छोटा होता है तो पहले रेंगना फिर करवट लेना शुरू करता है। उसके बाद घुटनों पर चलना और फिर खड़ा होना सीखता है। अगर 9-11 महीने में क्रॉलिंग नहीं करता तो ये विकास में देरी के संकेत हैं।
क्रॉलिंग एक शारीरिक व्यायाम है। ये मानव उत्पत्ति का एक हिस्सा है। बच्चा जब छोटा होता है तो पहले रेंगना फिर करवट लेना शुरू करता है। उसके बाद घुटनों पर चलना और फिर खड़ा होना सीखता है। अगर 9-11 महीने में क्रॉलिंग नहीं करता तो ये विकास में देरी के संकेत हैं।
इससे शारीरिक व मानसिक विकास होता है। बच्चे की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। घुटने के बल चलने से हड्डियां मजबूत होती हैं। ये फुल बॉडी व्यायाम है। कई बार बच्चा कमजोर हो तो वह क्रॉलिंग में ज्यादा समय ले सकता है।
बच्चे की पहुंच में वह चीज न रखें जो नुकसान पहुंचाए। आसपास तेल, साबुन, ज्वलनशील पदार्थ या नुकीली चीज न रखें।