
Dental Calculus: दांतों पर पीली, भूरी या काली परत नजर आती है और यह सामान्य ब्रश करने से साफ नहीं होती, तो यह टार्टर हो सकता है। इसे डेंटल कैलकुलस भी कहा जाता है। टार्टर दांतों पर जमा हुआ कठोर प्लाक होता है, जो दांतों की सतह के साथ साथ मसूड़ों की लाइन के ऊपर और नीचे भी जमा हो सकता है। आइए जानते हैं यह क्यों जमता है और इससे जुड़ी कौन कौन सी परेशानियां हो सकती हैं।
प्लाक एक चिपचिपी परत होती है, जो मुंह में मौजूद बैक्टीरिया के भोजन में मौजूद शुगर पर प्रतिक्रिया करने से बनती है। नियमित रूप से ब्रशिंग और फ्लॉसिंग से इसे हटाया जा सकता है। लेकिन अगर प्लाक लंबे समय तक दांतों पर जमा रहे तो यह धीरे धीरे कठोर होकर टार्टर में बदल सकता है। क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार टार्टर को ब्रश और फ्लॉसिंग से अकेले हटाना संभव नहीं होता। वहीं नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन (NCBI) के अनुसार डेंटल कैलकुलस मिनरलाइज्ड बैक्टीरियल प्लाक होता है। यह उन जगहों पर ज्यादा बनता है जहां लार की लगातार सप्लाई रहती है। खास तौर पर ऊपर की पिछली दाढ़ों की बाहरी सतह और नीचे के आगे के दांतों की अंदरूनी सतह पर इसका जमाव ज्यादा देखा जाता है, क्योंकि इन क्षेत्रों के पास लार की नलिकाएं मुंह में खुलती हैं।
नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन (NCBI) के अनुसार प्लाक बनने के बाद डेंटल कैलकुलस का कैल्सिफिकेशन करीब 1 से 14 दिनों के भीतर शुरू हो सकता है और लगभग 12 दिनों में इसका 60 से 90 प्रतिशत तक कैल्सिफिकेशन हो सकता है। इसमें लार से मिलने वाले मिनरल्स की अहम भूमिका होती है।
क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार दांतों पर टार्टर बनने पर कुछ संकेत दिखाई दे सकते हैं।
क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार अगर कोई व्यक्ति नियमित रूप से ब्रश और फ्लॉस नहीं करता, ज्यादा मात्रा में मीठे खाद्य पदार्थ और पेय लेता है, धूम्रपान या दूसरे तंबाकू उत्पादों का इस्तेमाल करता है, ब्रेसेज लगाता है या मुंह सूखने की समस्या से जूझता है, तो प्लाक और टार्टर बनने का खतरा बढ़ सकता है। नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन (NCBI) के अनुसार, जिन जगहों पर दांतों की सफाई मुश्किल होती है, वहां प्लाक लगातार जमा होकर मिनरलाइज हो सकता है और डेंटल कैलकुलस बन सकता है।
क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार टार्टर को लंबे समय तक नहीं हटाने पर मसूड़ों से जुड़ी बीमारी और कैविटी का खतरा बढ़ सकता है। इससे इनेमल प्रभावित हो सकता है और मसूड़ों में सूजन तथा खून आने की समस्या भी हो सकती है।
क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार एक बार प्लाक टार्टर में बदल जाए तो सामान्य ब्रशिंग और फ्लॉसिंग से इसे हटाया नहीं जा सकता। इसे डेंटिस्ट या डेंटल हाइजीनिस्ट विशेष उपकरणों की मदद से प्रोफेशनल डेंटल क्लीनिंग के दौरान हटाते हैं। घर पर किसी नुकीली चीज से टार्टर को खुरचकर हटाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। ऐसा करने से दांतों को नुकसान पहुंच सकता है और कैविटी या दूसरी ओरल हेल्थ समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
टार्टर बनने से रोकने के लिए सबसे जरूरी है कि दांतों पर प्लाक जमा न होने दिया जाए। क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार इसके लिए ये उपाय मददगार हो सकते हैं-
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।