
हाथ-पैरों पर छोटे सफेद निशान किस कारण से होते है- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)
Idiopathic Guttate Hypomelanosis Symptoms: क्या आपने कभी अपने हाथों या पैरों पर गौर किया है कि वहां छोटे-छोटे, बिल्कुल चावल के दाने या पानी की बूंद जैसे सफेद धब्बे से बन गए हैं? अक्सर जब लोग पहली बार इन्हें देखते हैं, तो घबरा जाते हैं। मन में सबसे पहला ख्याल यही आता है कि कहीं यह सफेद दाग वाली बीमारी (विटिलिगो) तो नहीं है? लेकिन आपको घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। हर सफेद दाग कोई बीमारी नहीं होता। डॉक्टरी भाषा में इन्हें इडियोपैथिक गुटेट हाइपोमेलेनोसिस (Idiopathic Guttate Hypomelanosis) कहते हैं। नाम सुनने में भले ही बहुत बड़ा और मुश्किल लगे, लेकिन सच यह है कि ये बिल्कुल बेअसर और बेहानिकारक धब्बे होते हैं। इनसे आपकी सेहत को कोई खतरा नहीं होता। आइए समझते हैं कि ये छोटे-छोटे निशान क्यों पड़ जाते हैं और इनके लक्षण क्या हैं।
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, इस बीमारी का नाम थोड़ा लंबा और मुश्किल लगता है, लेकिन इसका अर्थ बहुत ही सरल है। इडियोपैथिक (Idiopathic) का मतलब सटीक कारण पूरी तरह से ज्ञात न हो। गुटेट (Guttate) यानी पानी की बूंदों के आकार जैसे दिखने वाले निशान। हाइपोमेलेनोसिस (Hypomelanosis), त्वचा में मेलेनिन (पिगमेंट जो हमारी स्किन को रंग देता है) की कमी होना। यानी, जब त्वचा के किसी छोटे हिस्से में रंग बनाने वाला पिगमेंट कम हो जाता है, तो वहाँ पानी की बूंद जैसे छोटे-छोटे हल्के या सफेद रंग के धब्बे बनने लगते हैं।
डर्मनेट के अनुसार, इस स्थिति को पहचानना बहुत आसान है क्योंकि इसमें त्वचा पर कोई बड़ा बदलाव या तकलीफ नहीं होती। इसके मुख्य लक्षण निम्नलिखित हैं;
हालांकि इसका कोई एक अकेला कारण नहीं है, लेकिन डॉक्टर्स का मानना है कि इसके पीछे ये कुछ आम वजहें होती हैं;
बिल्कुल नहीं! ये निशान किसी भी तरह का स्किन कैंसर नहीं हैं और न ही ये छुआछूत की बीमारी हैं जो एक इंसान से दूसरे में फैले। ये पूरी तरह से सुरक्षित हैं।हां, कुछ लोगों को बस यह सोचकर खराब लगता है कि हाथों-पैरों पर ये दाग दिखने में अच्छे नहीं लग रहे।
ये कोई बीमारी नहीं हैं, इसलिए डॉक्टरी हिसाब से इनके इलाज की कोई खास जरूरत नहीं होती। फिर भी, अगर आप इन्हें कम करना चाहते हैं तो कुछ बातें ध्यान में रख सकते हैं;
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
Updated on:
7 Sep 2026, 9:12 AM IST
Published on:
7 Sep 2026, 9:12 AM IST
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