Baar-Baar Bhookh Lagne ke Karan: क्या आपको भी खाना खाने के तुरंत बाद भूख लग जाती है? जानें क्यों पेट भरा होने के बाद भी दिमाग देता है खाने का सिग्नल। एक्सपर्ट की राय और रिसर्च के साथ पूरी रिपोर्ट।
Causes of Excessive Hunger: अक्सर हम उन लोगों को खुशकिस्मत समझते हैं जिन्हें बहुत भूख लगती है और वे सब कुछ हजम कर जाते हैं। लेकिन मेडिकल साइंस की नजर में, हर समय कुछ न कुछ खाने की इच्छा होना (जिसे डॉक्टरी भाषा में पॉलीफेजिया कहा जाता है) सामान्य नहीं है। अगर आपका पेट भरा होने के बावजूद आपका दिमाग बार-बार 'रिफिल' का सिग्नल दे रहा है, तो यह संकेत है कि आपके शरीर का आंतरिक सिस्टम संतुलन खो चुका है।
'Journal of Clinical Endocrinology & Metabolism' में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, बार-बार भूख लगना केवल पेट की समस्या नहीं, बल्कि हार्मोनल असंतुलन का परिणाम है। शरीर में दो मुख्य हार्मोन घ्रेलिन (Ghrelin), जो भूख बढ़ाता है, और लेप्टिन (Leptin), जो पेट भरने का संकेत देता है। जब आपस में तालमेल खो देते हैं, तो इंसान 'अनकंट्रोल्ड ईटिंग' का शिकार हो जाता है। रिसर्च में यह भी पाया गया कि जो लोग रात में 6 घंटे से कम सोते हैं, उनमें घ्रेलिन का स्तर 15% तक बढ़ जाता है, जिससे उन्हें दिनभर हाई-कैलोरी फूड की क्रेविंग होती है।
ज्यादातर लोग इसे डायबिटीज का शुरुआती लक्षण मानते हैं, और वे सही हैं। जब शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस पैदा होता है, तो आपके द्वारा खाया गया खाना (ग्लूकोज) ऊर्जा में बदलकर कोशिकाओं (Cells) तक नहीं पहुँच पाता। नतीजा यह होता है कि आपका रक्त शर्करा से भरा होता है, लेकिन आपकी कोशिकाएं 'भूखी' रह जाती हैं। इसी कमी को पूरा करने के लिए दिमाग बार-बार खाने का आदेश देता है।
मशहूर एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. आर. के. गुप्ता इस स्थिति पर अपना कोट देते हुए कहते हैं। "बार-बार भूख लगना शरीर का एक 'इमरजेंसी सिग्नल' है। जब मरीज शिकायत करता है कि उसे हर दो घंटे में कुछ चाहिए, तो हम सबसे पहले उसके लिवर और पैन्क्रियाज की जांच करते हैं। अक्सर यह 'प्री-डायबिटीज' या 'हाइपरथायरायडिज्म' का शुरुआती संकेत होता है। इसे 'मेटाबॉलिज्म तेज होना' समझकर नजरअंदाज करना सबसे बड़ी गलती है, क्योंकि यह भविष्य में टाइप-2 डायबिटीज और ऑर्गन डैमेज का कारण बन सकता है।"
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।