बुजुर्गों के अलावा आजकल खानपान की गलत आदतों के अलावा कुछ रोगों के मामले युवावस्था में भी देखे जाते हैं। ऐसा ही एक रोग है हाइटल हर्निया, इसमें भोजन बार-बार गले में आने की शिकायत होती है।
कई बार भोजन करने के बाद खाना गले में आने जैसा महसूस होता है। इसे हाइटल हर्निया कहते हैं। यह दिक्कत युवावस्था के बाद ही होती है। इससे भोजन नली और पेट को जोड़े रखने वाले वॉल्व के कमजोर हो जाता है। इस कारण पेट का कुछ भाग भोजन नली में आ जाता है। जिससे खाना भी ऊपर की ओर आ जाता है। जाने इस समस्या से जुड़े अन्य लक्षण व कारणों के बारे में -
3 बार की बजाय दिनभर में 5-6 बार थोड़ी थोड़ी मात्रा में भोजन करना चाहिए।
बढ़ती आशंका
गेस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट डॉ. सुधीर महर्षि के के अनुसार अधिक वजन व उम्र के अलावा आनुवांशिक, मधुमेह, लंबे समय से खांसी की दिक्कत और धूम्रपान करने वालों का वॉल्व कमजोर हो जाता है। गर्भावस्था के दौरान पेट पर ज्यादा फैट जमा होने से भी इस रोग की आशंका बढ़ती है।
प्रमुख लक्षण
सीने में जलन, खाना ऊपर आना, अनिद्रा, बेचैनी व एसिडिटी। लंबे समय तक इस कारण फूड पाइप में आई सूजन अल्सर की वजह बनती है। पेट का हिस्सा सांस नली में जाने से अस्थमा, निमोनिया और ईएनटी संबंधी संंक्रमण हो सकता है।
्प्रमुख जांच और इलाज
एंडोस्कोपी से रोग की स्थिति का पता कर दवाओं से इलाज करते हैं। भोजन से आधा घंटा पहले दवा देते हैं ताकि भोजन तेजी से पेट से आगे चला जाए। इसके अलावा खानपान में परहेज व दिनचर्या में बदलाव भी जरूरी होता है। ५-१० साल से दिक्कत है तो फंडोप्लीकेशन तकनीक से वॉल्व रिपेयर करते हैं। खानपान में मीठी, खट्टी, तैलीय चीजों से परहेज करें। भोजन करने के तुरंत बाद लेटने से बचें। खाने के आधे घंटे बाद पानी पीएं। रात को सोने से ३-४ घंटे पहले भोजन करें। सोते समय सिरहाना ऊंचा रखें। इसमें नियमित हल्के व्यायाम भी किए जा सकते हैं। आंतें मजबूत होती हैं।