हॉलिडेज बढ़े, तो हो गई पढ़ाई की छुट्टी!

हॉलिडेज बढ़ने से टीचर्स परेशान, कैसे सिलेबस पूरा करवाएं
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Nov 26, 2015
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प्रशांत श्रीवास्तव, लखनऊ.
बच्चों को छुट्टियों का इंतजार हमेशा ही रहता है ताकि वे अपने दोस्तों संग इसे एंजॉय कर सकें। सरकार भी लगता है कि बच्चों की ख्वाइशों को पूरा कर रही है। यूपी सरकार ने हॉलिडे कैलेंडर में 9 हॉलिडेज बढ़ा दिए हैं। ऐसे में बच्चे तो जी भर के हॉलिडेज एंजॉय कर रहे हैं लेकिन टीचर्स परेशान हैं। उन पर प्रेशर है कि किसी तरह बच्चों का सिलेबस पूरा करवाया जाए। इसके अलावा एग्जाम्स की तारीखों को लेकर भी स्कूल मैनेजमेंट कन्फ्यूजन में हैं। कई स्कूलों ने एग्जाम्स की तारीख आगे बढ़ाने का फैसला किया है।


जयंती पर छुट्टी के बजाए बताना चाहिए माहपुरुष के बारे में

कैलेंडर में नौ छुट्टियां और बढ़ जाने से अब साल में 200 से भी कम एकेडमिक डेज बचे हैं। ऐसे में कोर्स पूरा करवाना स्कूलों के लिए एक चैलेंज हो गया है। स्प्रिंगडेल कॉलेज की डायरेक्टर रीता खन्ना का कहना है कि हॉलिडेज में बढ़ोतरी होने से स्कूल मैनेजमेंट परेशानी में है। परेशानी ये है कि आखिर बच्चों के कोर्स को कैसे कंप्लीट करवाएं। एक्स्ट्रा क्लासेज लेते हैं तो उसके लिए भी प्रशासन से परमीशन लेनी पड़ेगी। सरकार महापुरुष की जयंती पर स्कूल में हॉलिडेज के बजाए उससे जुड़ा कार्यक्रम कराए तो बच्चों को महापुरुष के बारे में भी ज्यादा जानकारी होगी और क्लासेज होने से उनका सिलेबस भी कंप्लीट हो पाएगा।


हॉलिडेज में नहीं पूरा होता होमवर्क

एलपीएस गोमती नगर की प्रिंसिपल डॉ. रुपाली पटेल का कहना है कि स्कूलों की छुट्टियां बढ़ाए जाने से बच्चों के सिलेबस पर तो असर पढ़ता ही है साथ ही एग्जाम्स की डेट्स भी रीशिड्यूल करनी पड़ती हैं। हमें भी अपने मिड-टर्म एग्जाम्स थोड़ा रीशिड्यूल करने पड़ सकते हैं। हमारी कोशिश है कि एक्स्ट्रा क्लासेज लगवाकर किसी तरह उनका सिलेबस पूर करवाया जाए। वहीं डीपीएस गोमती नगर एक्सटेंशन की प्रिंसिपल मनीषा अंथवाल भी इस बात से इत्तेफाख रखती हैं कि स्कूलों की बढ़ती छुट्टियां स्कूल मैनेजमेंट के लिए चिंता विषय है। हॉलिडेज में कई बच्चे होमवर्क भी कंप्लीट नहीं करते। जब वो हॉलिडेज के बाद आते हैं तो उनसे पेंडिंग होम वर्क पहले करवाया जाता है। ऐसे में छुट्टियां बढ़ना चिंता का विषय तो है ही।



बच्चे कोचिंग क्लासेज करने को मजबूर
हॉलिडेज बढ़ने से सिलेबस पूरा नहीं हो पा रहा है ऐसे में पैरंट्स बच्चों को कोचिंग और ट्यूशन लेने के लिए ज्यादा भेज रहे हैं। आशियाना में रहने वाले आशीष वर्मा बताते हैं कि वे अपने बच्चे को कोचिंग या ट्यूशन या कोचिंग भेजने के खिलाफ थे लेकिन स्कूल में सिलेबस न पूरा होने के वजह से उन्हें भेजना पड़ रहा है। उनका बच्चा एक अंग्रेजी माध्यम स्कूल में नवीं क्लास में पढ़ता है। वहीं अपने घर पर ट्यूशन पढ़ाने वाले इंदिरा नगर के अंकुर बताते हैं कि पिछले दिनों हाईस्कूल-इंटर के बच्चे उनसे ज्यादा पढ़ने आने लगे हैं। वे बच्चे कहते हैं कि उनका आधा सिलेबस नहीं हुआ है, प्री-बोर्ड आने वाले हैं प्लीज कोर्स कंप्लीट करवा दीजिए।

Published on:
26 Nov 2015 05:51 pm