स्वास्थ्य

सरकार ने बताया Health Insurance के नए नियम, भारत का ये सेक्टर 9 प्रतिशत बढ़ा, प्रीमियम 1.2 लाख करोड़ के पार

India Health Insurance Sector : भारत का स्वास्थ्य बीमा क्षेत्र में तेजी से बढ़ता दिख रहा है। सरकार ने गुरुवार को कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 में इस सेक्टर का कुल प्रीमियम 1.2 लाख करोड़ रुपए के पार पहुंच गया है। साथ ही देश का हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर 9 प्रतिशत बढ़ा है। क्लेम सेंटलमेंट को लेकर नए नियम भी बताए।
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Mar 26, 2026
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प्रतीकात्मक तस्वीर | Photo - Patrika

India Health Insurance Sector : भारत का स्वास्थ्य बीमा क्षेत्र में तेजी से बढ़ता दिख रहा है। सरकार की दी गई जीएसटी छूट और नए नियम कानून के कारण प्रगति साख दिख रही है। सरकार ने गुरुवार को कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 में इस सेक्टर का कुल प्रीमियम 1.2 लाख करोड़ रुपए के पार पहुंच गया है। साथ ही देश का हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर 9 प्रतिशत बढ़ा है।

कैशलेस हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम के लिए सख्त नियम

सरकार ने इस ग्रोथ के पीछे लोगों में बढ़ती जागरूकता, हेल्थ फाइनेंसिंग की बेहतर पहुंच और मेडिकल खर्चों से बचाव की बढ़ती जरुरत प्रमुख कारण हैं। जान लें कि बीमा क्षेत्र को और बेहतर बनाने के लिए भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने कैशलेस हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम के लिए सख्त समय सीमा तय की है।

कैशलेस प्री-ऑथराइजेशन रिक्वेस्ट को 1 घंटे के भीतर मंजूरी दें

इन नए नियमों के अनुसार, बीमा कंपनियों को कैशलेस प्री-ऑथराइजेशन रिक्वेस्ट को एक घंटे के भीतर मंजूरी देनी होगी, जबकि अंतिम मंजूरी तीन घंटे के अंदर पूरी करनी होगी। सरकार का ये भी कहना है कि इन कदमों से क्लेम में देरी कम होगी और मरीजों को समय पर इलाज मिल सकेगा।

हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम में बढ़ोतरी के कारण

  • पॉलिसीधारकों की बढ़ती उम्र
  • ज्यादा कवर राशि
  • बेहतर पॉलिसी फीचर्स

रेगुलेटर के 2024 के दिशा-निर्देश यह भी सुनिश्चित करते हैं कि बीमा उत्पादों की कीमत जोखिम के आधार पर तय हो और समय-समय पर आंकड़ा और ग्राहकों की प्रतिक्रिया के आधार पर उनकी समीक्षा की जाए।

क्लेम सेटलमेंट के मामलों में भी सुधार

  • 2024-25 में क्लेम भुगतान अनुपात 87.5 प्रतिशत रहा
  • 2023-24 में 82.46 प्रतिशत
  • 2022-23 में 85.66 प्रतिशत

आईआरडीएआई के 'बीमा भरोसा' पोर्टल के आंकड़ों के मुताबि, वित्त वर्ष 2025 में जनरल और हेल्थ इंश्योरेंस से जुड़ी 1,37,361 शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें से करीब 93 प्रतिशत का समाधान उसी वित्त वर्ष में कर दिया गया।

कुछ मामलों में क्लेम खारिज होने के कारण

  • बीमा कवर से ज्यादा खर्च
  • को-पेमेंट
  • सब-लिमिट
  • डिडक्टिबल
  • रूम रेंट लिमिट
  • गैर-चिकित्सीय खर्च

रेगुलेटर ने पारदर्शिता बढ़ाने और क्लेम प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य पॉलिसीधारकों का भरोसा बढ़ाना और देश में हेल्थ इंश्योरेंस सिस्टम को ज्यादा भरोसेमंद और प्रभावी बनाना है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का फैसला

भारत में हेल्थ इंश्योरेंस को लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 22 सितंबर, 2025 को बड़ा फैसला लिया था। हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम पर 18% जीएसटी को खत्म कर उसे पूरी तरह से टैक्स-फ्री करने की घोषणा की थी। बता दें, यह निर्णय 56वीं जीएसटी परिषद की बैठक में लिया था।

Updated on:
26 Mar 2026 05:22 pm
Published on:
26 Mar 2026 05:22 pm