Indian Youth Mental Health: Sapien Labs की रिपोर्ट में खुलासा भारत के युवा मानसिक स्वास्थ्य में पिछड़ रहे हैं। जानिए कारण, असर और समाधान।
Indian Youth Mental Health: आज की तेज रफ्तार जिंदगी में युवाओं का मानसिक स्वास्थ्य एक बड़ी चिंता बनता जा रहा है। हाल ही में आई एक ग्लोबल रिपोर्ट ने इस बात को और गंभीर बना दिया है। Sapien Labs की Global Mind Health 2025 रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के 18 से 34 साल के युवाओं का मानसिक स्वास्थ्य काफी कमजोर पाया गया है।
रिपोर्ट में बताया गया कि भारतीय युवाओं का Mind Health Quotient (MHQ) स्कोर सिर्फ 33 है और वे 84 देशों में 60वें स्थान पर हैं। यानी साफ है कि आज के युवा मानसिक रूप से पहले की पीढ़ियों जितने मजबूत नहीं रह गए हैं।
MHQ कोई साधारण टेस्ट नहीं है जो सिर्फ डिप्रेशन या एंग्जायटी मापे। यह एक बड़ा पैमाना है, जिसमें 47 अलग-अलग चीजें देखी जाती हैं, जैसे भावनाओं को संभालना, ध्यान लगाना, तनाव झेलने की क्षमता, रिश्तों की स्थिरता और मानसिक ऊर्जा। कम स्कोर का मतलब है कि व्यक्ति रोजमर्रा की चुनौतियों को संभालने में संघर्ष कर सकता है।
इस रिपोर्ट की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 55 साल से ज्यादा उम्र के भारतीयों का MHQ स्कोर 96 रहा, जो लगभग सामान्य स्तर माना जाता है। यानी बुजुर्ग लोग मानसिक रूप से युवाओं से कहीं ज्यादा संतुलित और मजबूत दिखे। यह पीढ़ियों के बीच बहुत बड़ा अंतर दिखाता है।
मानसिक स्वास्थ्य सिर्फ मन का मामला नहीं है, इसका सीधा असर जिंदगी के हर हिस्से पर पड़ता है। ध्यान और फोकस कम होने से काम की क्षमता घटती है। भावनाएं संभालने में परेशानी से रिश्ते कमजोर हो सकते हैं। सर्वे बताते हैं कि शहरों में रहने वाले आधे लोग रोजमर्रा के तनाव से जूझ रहे हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक इसके पीछे कई आधुनिक कारण हैं। कम उम्र में स्मार्टफोन का इस्तेमाल, कम उम्र में डिजिटल दुनिया में ज्यादा समय बिताने से ध्यान और सामाजिक व्यवहार प्रभावित होता है। जंक और पैकेट वाले खाने का ज्यादा सेवन दिमाग और भावनाओं पर असर डालता है। पहले जैसी मजबूत पारिवारिक जुड़ाव अब कम होता जा रहा है।
युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य में गिरावट पूरी दुनिया में देखी जा रही है। जैसे जापान, यूनाइटेड किंगडम और चीन जैसे विकसित देशों में भी युवाओं का मानसिक स्वास्थ्य कमजोर पाया गया है।
यह सिर्फ एक रिपोर्ट नहीं, बल्कि चेतावनी है। अगर युवाओं का मानसिक स्वास्थ्य कमजोर होता गया तो इसका असर समाज, अर्थव्यवस्था और रिश्तों सब पर पड़ेगा। परिवार, स्कूल, कार्यस्थल और सरकार सभी को मिलकर युवाओं को बेहतर मानसिक सपोर्ट देना होगा। सही समय पर कदम उठाना जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ी मानसिक रूप से मजबूत और खुशहाल रह सके।