स्वास्थ्य

EXPERT INTERVIEW : इम्युनिटी बढ़ाने के लिए दवाएं अपने मन से खाना कितना ठीक है?

कोरोना वायरस से पूरी दुनिया परेशान है। इसके इलाज के लिए अभी तक कोई कारगर दवा नहीं है। टीके बनाने के लिए वैज्ञानिक जुटे हुए हैं, लेकिन अभी एक साल से ज्यादा का समय लग सकता है। इसलिए बचाव ही इलाज है। इस विषय पर अमरीका के पेन्सिलवेनिया में संक्रामक बीमारियों डॉ. जाहिदा भटटी से पत्रिका संवाददाता रमेश कुमार सिंह ने उनसे विशेष बातचीत की। डॉ. जाहिदा इंटरनल मेडिसिन में एमडी हैं। वर्तमान में नॉर्थवेस्ट अलायंस मेडिकल गु्रप एरी, पेन्सिलवानिया में मेडिकल डायरेक्टर हैं। उन्हें बीस से अधिक साल का अनुभव है।

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Apr 17, 2020

सवाल : जिन्हें हल्के जुकाम के लक्षण हैं और स्वत: ठीक हो रहे हैं। क्या वह भी कोरोना संक्रमित हैं?
ऐसे लोग जिनमें माइल्ड सिम्पटम्स यानी सर्दी-जुकाम के लक्षण हैं लेकिन लगातार तेज बुखार व कफ नहीं आ रहा है तो बचाव, सावधानियों से वह ठीक हो जाते हैं। कोरोना जानलेवा कम, संक्रामक ज्यादा है। इसलिए इस वायरस से 80 प्रतिशत ऐसे लोग हैं जो संक्रमित तो हुए पर कुछ सावधानियों को बरतकर ठीक हो गए। ऐसे लोगों हर्ड इम्युनिटी में आते हैं।
सवाल : क्या भारत में कोरोना के कम केस आने की वजह हर्ड इम्युनिटी का तैयार होना है?
भारत ने चीन, अमरीका, ब्रिटेन, स्पेन आदि देशों की अपेक्षा सबसे पहले कम्पलीट लॉकडाउन किया। और कई कड़े कदम उठाए जो अन्य देशों ने हालात बेकाबू होने के बाद उठाया। इसलिए यहां पर ज्यादा संभावना है कि हर्ड इम्युनिटी तैयार हुई हो। इस बीच संक्रमितों में से 80 प्रतिशत लोग स्वत: ठीक हो गए हों। इसलिए अगले दो सप्ताह तक केस बढऩे की संख्या नियंत्रित रहती है तो यह महामारी गंभीर रूप नहीं ले पाएगी।
सवाल : कुछ लोग इम्युनिटी मजबूत करने के लिए कुछ दवाएं अपने मन से खा रहे हैं, कितना उचित है?
यह बिल्कुल ठीक नहीं है। मलेरिया की दवा शरीर में सूजन को कम करती है। संक्रमण की वजह से शरीर की सूजन को कम कर सकती है जो अभी गंभीर रूप से बीमार नहीं है तो वे चिकित्सक की सलाह से दवा ले सकते हैं। लेकिन जो संक्रमित नहीं हैं वे लेते हैं तो उनकी इम्युनिटी बढऩे की बजाय घटती है। इसके और भी साइड इफेक्ट हो सकते हैं।

Published on:
17 Apr 2020 07:17 pm
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