लंदन: एक अध्ययन से पता चलता है कि एक साधारण ब्लड टेस्ट दिल का दौरा पड़ने से पहले के महीनों में सक्रिय कई महत्वपूर्ण जैविक प्रक्रियाओं का पता लगाने में मदद कर सकता है। दिल का दौरा दुनिया भर में मौत का सबसे आम कारण है और वैश्विक स्तर पर बढ़ रहा है। कई उच्च जोखिम वाले लोगों की पहचान नहीं की जाती है या वे अपना निवारक उपचार नहीं लेते हैं।
कोरोना वायरस का नया वैरिएंट JN.1 वैज्ञानिकों के लिए चिंता का विषय बन गया है। इसकी खासियत ये है कि ये बहुत तेजी से फैलता है और टीकों से बच निकलने में भी माहिर है।
JN.1 वैरिएंट में 30 से ज्यादा स्पाइक प्रोटीन म्यूटेशन पाए गए हैं, जिससे ये आसानी से फैल सकता है। साथ ही, ये वैरिएंट मौजूदा टीकों से कुछ हद तक बच निकलने में भी सक्षम है।
नवंबर 2023 के अंत तक, JN.1 वैरिएंट फ्रांस और स्पेन में तेजी से फैल चुका था। ये इस बात का संकेत देता है कि ये वैरिएंट दुनियाभर में फैल सकता है।
जापान के वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि JN.1 वैरिएंट से खतरे से निपटने के लिए तत्काल शोध की जरूरत है। इसका तेजी से फैलना और टीकों से बचने की क्षमता इसे खतरनाक बनाती है।
प्रोफेसर केई सातो (टोक्यो विश्वविद्यालय) का कहना है कि "JN.1 वैरिएंट पर शोध से हमें न सिर्फ कोरोना को समझने में मदद मिलेगी बल्कि भविष्य की महामारियों से लड़ने के लिए भी जरूरी जानकारी मिल सकती है।"
निरंतर निगरानी और शोध जरूरी
JN.1 वैरिएंट के उभरने से ये साफ हो गया है कि कोरोना वायरस के नए वैरिएंट पर लगातार निगरानी और शोध जरूरी है। इससे हम इस वायरस से बेहतर तरीके से लड़ सकेंगे।