प्राकृतिक चिकित्सा में स्वस्थ हृदय के लिए सबसे अच्छी तकनीक है, क्लींजिंग। इसमें सबसे पहले पेट पर गर्म पानी का सेक, फिर पेट पर मिट्टी की पट्टी व इसके बाद एनिमा शामिल है। स्वस्थ हृदय के लिए एक और उपाय कर सकते हैं वह है पैरों को हल्के गुनगुने पानी में डालना। इसे नियमित करना चाहिए। नहाते समय कम से कम 20 मिनट के लिए गीले कपड़े से पूरे शरीर पर मसाज के तौर पर स्क्रब करें। इसे सेल्फ मसाज कहा जाता है।
प्राकृतिक चिकित्सा में स्वस्थ हृदय के लिए सबसे अच्छी तकनीक है, क्लींजिंग। इसमें सबसे पहले पेट पर गर्म पानी का सेक, फिर पेट पर मिट्टी की पट्टी व इसके बाद एनिमा शामिल है। स्वस्थ हृदय के लिए एक और उपाय कर सकते हैं वह है पैरों को हल्के गुनगुने पानी में डालना। इसे नियमित करना चाहिए। नहाते समय कम से कम 20 मिनट के लिए गीले कपड़े से पूरे शरीर पर मसाज के तौर पर स्क्रब करें। इसे सेल्फ मसाज कहा जाता है।
ये प्राणायाम असरकारक
अनुलोम-विलोम, भस्त्रिका प्राणायाम, भ्रामरी प्राणायाम नियमित किया जाए तो रक्त संचार बढ़ेगा।
उचित नींद जरूरी
इसके लिए रात को सोने से पहले नाक में गाय का घी डालें। पैरों को थोड़ी देर गर्म पानी में डालकर रखें। उसके बाद सोएं तो नींद अच्छी आएगी।
अर्जुन की छाल है कारगर
छाल का पाउडर, काढ़ा या छाल को पानी में भिगोकर जैसे भी लिया जाए यह हृदय रोग में काम आती है।
गर्म पाद स्नान
गर्म पाद स्नान भी प्रभावी है। सिर को गीला कर एक गिलास पानी पीएं। पैरों को गुनगुने पानी में रखें। ऊपर से कंबल ओढ़ लें। उसके बाद सिर पर गीला तौलिया रखें और धीरे-धीरे पानी डालते रहें। पसीना आने पर ठंडे पानी में निचोड़े हुए कपड़े से शरीर को पोछें। पैरों को गुनगुने पानी से निकालकर सामान्य पानी में रखकर निकाल लें व सूखे तौलिए से पोंछें।